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बढ़ता प्रदूषण, मौसम में बदलाव सेहत के लिए खतरनाक

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वायु प्रदूषण और बदलते मौसम की वजह से अस्पताल में सांस, दमा, एलर्जी वाले मरीजाें की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को ज्यादा सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। मंडलीय अस्पताल में फिजिशियन डॉ. निशांत चौधरी के अनुसार, पिछले सप्ताह तक ओपीडी में 60 मरीज आते थे। अब मरीजों की संख्या बढ़कर 100 हो गई है। सितंबर में 1245 मरीजों की ओपीडी रही। वहीं, अक्तूूबर में 1457 मरीजों का इलाज हुआ। ज्यादातर मरीज वायरल फीवर, डेंगू मलेरिया, टाइफाइड, शुगर, उच्च रक्तचाप और टीबी के थे। वायु प्रदूषण बहुत है। ऊपर से हवा की गति कम और नमी ज्यादा रहती है। इससे प्रदूषित कण हवा में मौजूद रहते हैं। जो सांस के जरिये संक्रमण फैलाते हैं। घर में साफ-सफाई के समय मास्क अवश्य पहनें। बाहर निकालने पर भी मास्क लगाएं। ये बाहर जाते समय पार्टिकुलेट मैटर को फिल्टर करते हैं। घर में पर्याप्त वेंटिलेशन होना चाहिए। रसोई में चिमनी या एग्जॉस्ट जरूर लगवाएं। यह किचेन में मौजूद गैस को बाहर कर देंगे।
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लंग कैंसर
डॉ. निशांत के अनुसार, वायु प्रदूषण लंग्स के लिए बेहद खतरनाक है। जोकि लोगों में बढ़ता ही जा रहा है। दूषित हवा में ज्यादा समय गुजारने से सीधे तौर पर फेफड़े प्रभावित होते हैं। प्रदूषित हवा में रहना दिन भर में कई सिगरेट पीने के बराबर है। आज का प्रदूषण सिगरेट पीने से भी ज्यादा खतरनाक हो चुका है।
हृदय संबंधी समस्याएं
वायु प्रदूषण फेफड़े के अलावा दिल के रोग भी देता है। प्रदूषित हवा दिल का दौरा पड़ने का बड़ा कारण है। प्रदूषण से जो समस्याएं हो सकती हैं, उसके लक्षण शरीर पर पहले ही दिखने लग जाते हैं। इससे सीने में दर्द, सांस लेने में समस्या, गले में दर्द जैसी दिक्कतें शामिल हैं।
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गर्भवती और नवजात शिशुओं के लिए खतरनाक
प्रदूषण न केवल स्वस्थ बल्कि नवजात शिशुओं और गर्भवती के लिए खतरनाक है। प्रदूषण न केवल महिला बल्कि होने वाले बच्चे को गंभीर रोग दे सकता है। दूषित हवा में ज्यादा समय गुजारने से बच्चे को निमोनिया होने और बीमारियों का सामना करने की क्षमता कम हो जाती है।
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