बनारस रेल इंजन कारखाना में बनने वाले रेल इंजनों की विदेशों में डिमांड काफी बढ़ गई है। अब तक बरेका द्वारा निर्मित 171 रेल इंजनों का प्रयोग 11 अन्य देशों में किया जा रहा है। इनमें तंजानिया, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, सूडान, सेनेगल, अंगोला, माली, मलेशिया और मोजांबिक शामिल हैं।
बीते साल हाल में मोजांबिक की मांग पर छह डीजल रेल (3100 एचपी, सीजी) इंजनों को भेजा गया है। इन इंजनों की खासियत यह है कि इनमें प्रयोग होने वाले 98 प्रतिशत सामान स्वदेशी हैं। वर्तमान में सबसे ज्यादा लोकोमोटिव डब्ल्यूएपी7 और लोकोमोटिव डब्ल्यूएजी-9 एच का निर्माण किया जा रहा है। लोकोमोटिव डब्ल्यूएपी7 यात्री इंजन है। यह 6000 अश्व शक्ति का मेन लाइन इलेक्ट्रिक इंजन है, जो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की क्षमता वाला है। लोकोमोटिव डब्ल्यूएजी-9 एच मालगाड़ी इंजन है। यह भी 6000 अश्व शक्ति का हैवी हॉल फ्रेट सर्विस इलेक्ट्रिक इंजन है, जो 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता है। इसकी विदेशों में काफी डिमांड है।
दो देशों से आई 36 रेल इंजनों की डिमांड
कंपनियों के माध्यम से बनारस रेल इंजन कारखाना बरेका से 36 रेल इंजनों की मांग आई है। जिसमें जिंबोंबे से पांच से छह लोको इंजनों के लिए और मलेशिया से 30 माल वाहक रेल इंजनों की डिमांड की गई है। जिंबांबे के लिए राइट्स कंपनी और मलेशिया के लिए इरकॉन कंपनी ने इंजनों की मांग की है।
तीन देशों ने किया संपर्क
बीते साल छह अक्तूबर को एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के माध्यम से तंजानिया और साउथ कोरिया ने भी बरेका से संपर्क किया था। जिसपर बरेका द्वारा रेल इंजनों की क्षमता के साथ इंजन की उपयोगिता और कार्य कुशलता का विवरण बनाकर उपलब्ध कराया गया है। जो प्रक्रिया में है। जबकि बीते साल मोजांबिक को छह रेल इंजन भेजे गए थे।
बरेका महाप्रबंधक ने कर्मियों की सराहना की
बरेका की महाप्रबंधक अंजली गोयल ने सर्वाधिक लोको निर्माण के लिए कर्मियों व अधिकारियों को सराहा। उन्होंने प्रमुख विभागाध्यक्षों लोको असेंबली शॉप, लोको फ्रेम शॉप, न्यू ब्लॉक शॉप को कोरोना काल में की गई इस उपलब्धि के लिए प्रोत्साहित करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान अब तक के सर्वाधिक रेल इंजनों का निर्माण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर इतिहास रचने पर कर्मचारियों की हौसला अफजाई करते हुए सभी को शुभकामनाएं दी हैं।