आयकर विभाग की टीम ने सोमवार को शराब कारोबारी हीरालाल जायसवाल के प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर रिकार्डों की जांच की। एक साथ बनारस और गाजीपुर में जायसवाल के प्रतिष्ठान पर चल रही इस कार्रवाई से हड़कंप मचा रहा।
सूत्रों की माने तो कालाधन खपाने के लिए फर्जी कंपनी बनाकर गोरखधंधे के मामले में ही यह कार्रवाई की गई। सुबह से लेकर देर रात तक चली इस कार्रवाई में टीम के सदस्यों ने जरूरी कागजातों के साथ ही कंप्यूटर के हार्ड डिस्क, बैंक खाते सहित कई जरूरी कागजात भी अपने कब्जे में ले लिया। जांच के बाद बड़े पैमाने पर कर चोरी का मामला सामने आ सकता है।
आयकर विभाग की ओर से इन दिनों कर चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने का अभियान चलाया जा रहा है। दो दिन पहले सनबीम, डालिम्स समूह की शाखाओं पर भी सर्वे कर कागजातों की जांच की थी। अब सोमवार को कोलकाता की आयकर टीम बनारस और गाजीपुर धमकी।
यहां कोलकाता में आयकर विभाग में उपनिदेशक जांच अनुराग दरिया के नेतृत्व में करीब 50 की संख्या में अधिकारी हीरालाल जायसवाल के बनारस के लालपुर स्थित आवास और पास में ही बने दो प्रतिष्ठान और गाजीपुर में भी एक ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान किसी को भी बाहर आने-जाने नहीं दिया गया।
सूत्रों की माने तो पिछले दिनों कोलकाता में आयकर विभाग की टीम ने करीब एक दर्जन से अधिक फर्मों पर छापेमारी की थी। जिसमें कई फर्में फर्जी मिली थी, उसमें हीरालाल जायसवाल की ओर से कर्मचारियों के नाम से बनाई गई फर्म भी शामिल थी। इसके बाद ही टीम यहां छापा मारने आई। इसमें लखनऊ और बनारस के भी कुछ अधिकारी शामिल रहे।
कर्मचारियों को भनक नहीं, और बन गए मालिक
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जांच के दौरान कोलकाता के पते पर कई फर्जी कंपनी बनाने, कर्मचारियों को उसमें निदेशक बनाने, कालेधन को सफेद करने सहित कई तरह की गड़बड़ियां टीम को मौके पर मिली। इसके बाद टीम के सदस्यों ने कागजात, कंप्यूटर हार्डडिस्क आदि को जब्त कर लिया।
इस बारे में पूछे जाने पर संयुक्त आयुक्त (जांच) गिरिराज पारिख ने छापेमारी की पुष्टि करते हुए कहा कि कोलकाता की टीम छापेमारी कर रही है। उन्हीं लोगों ने बनारस से सहयोग मांगा था, जिसके बाद यहां के अधिकारी भी भेजे गए हैं।
हीरालाल जायसवाल की ओर से बनाए गए फर्मों के मालिक उसके कर्मचारी है, इसकी कर्मचारियों को भनक तक नहीं लगी। इसका खुलासा तो तब हुआ जब आयकर टीम के जांच में इसका खुलासा हुआ। इसके बाद तो कर्मचारियों के होश उड़ गए।
सूत्रों की माने तो कर्मचारियों को मालिक बनाकर उनके नाम से ही खाते भी खुलवाए गए और उसी से रुपयों का लेन-देन भी हो रहा था। यह काम तो लंबे समय से चल रहा था लेकिन टीम को इसकी जानकारी आयकर रिटर्न की जांच में हुई, इसके बाद से ही कोलकाता में ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद बनारस में टीम आई।