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यूपी: यहां छापे जा रहे थे नकली नोट, छापेमारी के बाद तीन गिरफ्तार, मास्टरमाइंड दूसरी कक्षा पास

Tue, 09 Oct 2018 10:33 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,मऊ
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala
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यूपी के मऊ में एटीएस के सहयोग से पुलिस ने नकली नोट छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने छापेमारी में 1.39 लाख 300 रुपये मूल्य के नकली नोट के साथ कलर प्रिंटर, तीन मोबाइल फोन, एक अदद लैपटॉप, बाइक और आधे कटे हाल में दस और बीस रुपये के स्टांप पेपर आदि बरामद किया।
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एसपी ललित कुमार सिंह ने कोतवाली में खुलासा करते हुए बताया कि एटीएस वाराणसी को नकली नोट छापने वाले गिरोह के बारे में सुराग हाथ लगा था। इस दौरान एटीएस सुराग लगाते हुए आजमगढ़ जिले के सठियांव बाजार से मो. तालिब अंसारी और मो. उस्मान को दबोचा लिया।

दोनों आरोपी शहर कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा मऊ के निवासी हैं। पकड़े गए दोनों आरोपियों ने पूछताछ में एटीएस वाराणसी टीम को बताया कि नकली नोट छापने का काम शहर कोतवाली क्षेत्र के मलिक ताहिरपुरा मुहल्ला निवासी मो. मंसूर करता है।
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इस पर एटीएस वाराणसी की टीम ने एसपी ललित कुमार से संपर्क साधा। इसके बाद शुक्रवार की रात ढाई बजे के करीब एटीएस और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से मलिक ताहिपुरा मोहल्ला निवासी मो. मंसूर के घर पर छापेमारी की।

इस दौरान आरोपी के घर से पुलिस को छपी नकली नोट एक लाख उनतालिस हजार तीन सौ रुपये की शक्ल में बरामद हुई। साथ ही नोट छापने में प्रयुक्त किए जाने वाला प्रिंटर और अन्य सामान बरामद हुए। नकली नोट छापने में आरोपी दस और बीस रुपये मूल्य के स्टांप पेपर का उपयोग करता था। 

छापेमारी के दौरान हो रही थी छपाई

बरामद नकली नोट - फोटो : amar ujala
एटीएस और पुलिस टीम ने जिस समय छापेमारी की उस समय आरोपी नोट छापने का काम कर रहा था, इसके कारण पुलिस को मौके से कटे स्टांप पेपर भी बरामद हुए। बरामद नकली नोटों में दो हजार के 15, पांच सौ के 185 नोट, सौ के आठ और बंद हो चुकी पांच सौ रुपये वाले 32 नोट बरामद हुए।

पकड़े गए आरोपियों के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। पूरी संभावना है कि और लोग भी इनके साथ होंगे। पकड़े गए आरोपियों का पुलिस ने जाली भारतीय मुद्रा बनाने, बंद हो चुकी पुरानी करेंसी चलाने आदि धाराओं में चालान कर दिया।

एसपी ने बताया कि नकली नोट छापने के आरोप में दबोचा गया मो. मंसूर पूर्व में अपने दोनों साथियों के साथ नेपाल से नकली नोट लाकर क्षेत्र में खपाने का काम करता था। लेकिन पुरानी करेंसी बंद होने पर इनका धंधा बंद हो गया। इस पर मंसूर ने खुद ही नकली नोट छापने का काम शुरू कर दिया। 

आरोपी चालीस हजार रुपये असली नोट के बदले आरोपी ग्राहक को एक लाख रुपये देते हैं। इन आरोपियों के बताने पर कुछ नाम सामने आए हैं, पुलिस अब इन लोगों के बारे में पता लगा रही है। जल्द ही इस गिरोह के और सदस्य पकड़े जाएंगे। 

नकली नोटों का यह धंधा काफी दिनों से चल रहा था

कोतवाली से दो सौ मीटर की दूरी पर नकली नोटों का यह धंधा काफी दिनों से चल रहा था। लेकिन कोतवाली पुलिस अनजान थी। एटीएस वाराणसी  ने जब गिरोह के दो सदस्यों को सठियांव में पकड़ा तो उनसे पूछताछ में जानकारी मिली। एटीएस ने ही कोतवाली पुलिस को जानकारी दी। जिले की स्वाट टीमों से लेकर एलआईयू तक को इस फर्जीवाड़े की भनक न चल पाने से पुलिस महकमे की नाकामी उजागर हो गई है।

नकली नोट छापने के मामले में गिरफ्तार आरोपी मो. मंसूर को कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि जब नोटबंदी लागू हुई तो नेपाल में नकली भारतीय करेंसी की आमद कम हो गई। इस दौरान बेरोजगारी हो गई और उसकी भी आमदनी बंद हो गई। एक बार मंसूर नेपाल के वीरगंज से दो हजार का नकली नोट लाया। लेकिन कागज खराब होने चला नहीं।

इस पर उसने सोचा कि क्यों न खुद ही नकली नोट छापे जाएं। इसके लिए उसने स्टांप पेपर का चुनाव किया। उसने लैपटाप, कलर प्रिंटर खरीद कर इस धंधे को शुुरू कर दिया। वह पहले से ही नकली नोटों के कारोबार से जुड़ा था, इसलिए उसे नकली नोटों को खपाने वाले युवकों को अपने साथ जोड़ने में परेशानी नहीं हुई। इस काम में उसने तालिब और उस्मान को भी साथ ले लिया।

ये दोनों नकली नोटों को ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई करने लगे। मंसूर ने बताया कि वह एक लाख नकली नोट के बदले दस हजार रुपये लेता था। एसपी ने बताया कि नकली नोट छापने वाला युवक महज दूसरी कक्षा तक ही पढ़ा है लेकिन उसका दिमाग तेज है। नकली नोटों को उसने इस प्रकार से डिजाइन किया है कि वह पहली नजर में असली जैसा लगता है और सामान्य आदमी उसे पहचानने में धोखा खा सकता है।
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पहले नेपाल से करता था धंधा

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नकली नोट छापने के आरोप में दबोचा गया मो. मंसूर पूर्व में अपने दोनों साथियों के साथ नेपाल से नकली नोट लाकर क्षेत्र में खपाता था। लेकिन पुरानी करेंसी बंद होने पर इनका धंधा बंद हो गया। इस पर मंसूर ने नकली नोट छापना शुरू कर दिया। चालीस हजार रुपये असली नोट के बदले आरोपी ग्राहक को एक लाख रुपये देते थे। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन आरोपियों के बताने पर कुछ नाम सामने आए हैं, पुलिस अब इन लोगों के बारे में जानकारी कर रही है। जल्द ही इस गिरोह के और सदस्य पकड़े जाएंगे।  
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