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काशी में स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा का खुला खजाना

Tue, 10 Nov 2015 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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धनतेरस पर सोमवार को पालनहारिणी स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के अन्न-धन का खजाना भक्तों के लिए खोल दिया गया। मां की झांकी निहारने और खजाना पाने के लिए भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि विश्वनाथ मंदिर के रेड जोन की कई गलियां जाम हो गईं।
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कतार में लगे भक्त थक कर कहीं बैठे नजर आए तो कहीं धक्कामुक्की होती रही। देर रात तक 1.25 लाख से अधिक भक्तों के मां के दरबार में हाजिरी लगाने का अनुमान है। स्वर्णमयी अन्नपूर्णा का पट वर्ष में एक बार सिर्फ धनतेरस पर ही खोला जाता है।
 
स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए रविवार की रात 12 बजे से ही कतार लगने लगी। बैरिकेडिंग के बीच हजारों श्रद्धालु इंतजार की घड़ियां गिनते रहे। भोर में 4:35 बजे सिद्धि योग में षोडशोपचार विधि से नोटों की गड्डियां, हीरे, मोती, स्वर्णाभूषणों और मुद्राओं के अलावा फल-फूल सजाकर मां की पूजा की गई।
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महंत रामेश्वरपुरी, उप महंत शंकरपुरी की मौजूदगी में पं. सत्यनारायण मिश्र ने पूजा कराई। फिर महाआरती के बाद सुबह पांच बजे भक्तों के लिए पट खोल दिया गया। मां अन्नपूर्णा के बायीं तरफ कटोरा फैलाए भगवान शिव। एक तरफ महालक्ष्मी और दूसरी ओर मां धात्री (पृथ्वी) के स्वरूप की झांकी मन मोहती रही।

इस दौरान बांस फाटक से गोदौलिया होते हुए दशाश्वमेध तक भक्तों की लाइन लग गई थी। दूसरी लाइन दशाश्वमेध, त्रिपुरा भैरवी से सरस्वती फाटक होते हुए लगी थी। दोपहर 12 से 12:30 बजे तक भोग आरती के समय भक्तों को रोक दिया गया। इससे गलियों में तमाम श्रद्धालु बैठ कर थकान मिटाते देखे गए। सुबह सात बजे से कतार में लगे तमाम भक्त शाम पांच बजे के बाद मां के दरबार पहुंच सके।

धक्कामुक्की और सुरक्षा के कड़े प्रबंधों के चलते हर किसी का महंत के उस कक्ष तक पहुंचना मुश्किल था, जहां वह अन्न-धन का खजाना वितरित कर रहे थे। खजाना पाने के लिए खूब जद्दोजहद होती रही। कंट्रोल रूम की व्यवस्था प्रबंधक काशी मिश्रा ने संभाली।
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