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हिमालय के पुष्पों से सजा धनवंतरि का दरबार

Tue, 10 Nov 2015 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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आरोग्य सुख के लिए रविवार को काशी में भगवान धनवंतरि के दर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। सिर्फ पांच घंटे के लिए झांकी आम भक्तों के लिए खोली गई। इस दौरान तमाम विदेशी आयुर्वेदाचार्यों ने भी हाजिरी लगाई। औषधीय जड़ी, बूटियों, पौधों से सजी झांकी के दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे।
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इस दौरान निरोगी काया की भगवान धनवंतरि से कामना की गई। सुड़िया स्थित धनवंतरि निवास में वर्ष में एक बार सिर्फ धनतेरस पर ही धनवंतरि के अष्टधातु की प्रतिमा का दर्शन होता है। जयंती पर दोपहर करीब 12 बजे भगवान धनवंतरि की पूजा शुरू हुई।

शाम पांच बजे पट भक्तों के लिए खोल दिया गया। प्रसिद्ध वैद्य पं. शिव कुमार शास्त्री ने पांच आचार्यों के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ धनवंतरि प्रतिमा की सविधि पूजा की। चांदी के सिंहासन पर विराजमान धनवंतरि के चतुर्भुज स्वरूप की झांकी सजाई गई।
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एक हाथ में अमृत कलश, दूसरे में चक्र, तीसरे में शंख और चौथे में रत्न सुशोभित थे। औषधियों के रूप में रस, स्वर्ण , हीरा, माणिक, पन्ना, मोती जैसे रत्न सजाए गए। इसके अलावा जड़ी-बूटियों में केसर, कस्तूरी, अंबर, अश्वगंधा, अमृता, शंखपुष्पी, मूसली का भोग लगाया गया।

प्रतिमा के आसपास हिमालय से मंगाए गए सुगंधित फूल सजाए गए थे। आर्किड, लिली, गुलाब, ग्लेडियोलस, रजनीगंधा, तुलसी, गेंदा के फूलों से शृंगार किया गया। आरती पं.रामकुमार शास्त्री, नंद कुमार शास्त्री और समीर शास्त्री ने की।  डीएम राजमणि यादव, एसएसपी आकाश कुलहरि ने भी हाजिरी लगाई।

हंगरी से आए बोरोस्ज्युला बोरोस, लूसा मोरिसस समेत कई विदेशी भक्तों ने भी दर्शन किए। उत्पल शास्त्री, आदित्य विक्रम शास्त्री, पवन सिंह ने व्यवस्था संभाली।
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