आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो.एसएन संखवार ने कहा कि बाल नेफ्रोलॉजिस्ट की कमी के उद्देश्य से इस तरह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रो.पुनीत कुमार ने बच्चों में गुर्दे की चोट की स्थिति जैसे मामलो के प्रबंधन के लिए उचित प्रशिक्षण को जरूरी बताया।
बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. ओपी मिश्रा ने कहा कि कहा कि सभी स्नातकोत्तर बाल रोग विशेषज्ञों को हीमोडायलिसिस और चिकित्सीय एफेरेसिस की मूलभूत जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि गंभीर रूप से बीमार बच्चों के उपचार में ये महत्त्वपूर्ण जीवनरक्षक कौशल हैं।
आयोजन सचिव प्रो. अभिषेक अभिनय ने बताया कि रीनल केयर प्रोजेक्ट द्वारा रूरल इंडिया सपोर्टिंग ट्रस्ट के सहयोग से संचालित पीडी-टीएएमई देशव्यापी क्षमता निर्माण पहल है, जिसका उद्देश्य बच्चों में गुर्दे से संबंधित आपात स्थितियों को पहचानने और उनका निवारण करने में सक्षम प्रथम स्तर के चिकित्सा कर्मियों का एक सशक्त नेटवर्क तैयार करना है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर के चिकित्सकों को बाल चिकित्सा डायलिसिस, चिकित्सीय एफेरेसिस और एक्यूट किडनी इंजरी के संबंध में व्यावहारिक प्रशिक्षण, मानकीकृत प्रोटोकॉल और केस-आधारित शिक्षण के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। अतिथियों का स्वागत बाल रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो.अंकुर सिंह और धन्यवाद ज्ञापन बाल रोग विभाग के नेफ्रोलॉजी प्रभाग के प्रो.अभिषेक अभिनय ने किया।इस दौरान प्रो. अभिजीत साहा, नीना जॉली आदि लोग मौजूद रहे।