वाराणसी। रीवा-गंगा महल घाट की सफाई में लगी दिल्ली की संस्था की लापरवाही सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत अस्सी घाट से लगे उत्तरी तरफ के घाटों की सिल्ट हटाने में नक्काशीदार पत्थरों की मढ़ियां टूट गई हैं।
यह मढ़ियां घाट निर्माण के दौरान संतों, भक्तों के ध्यान लगाने के लिए बनवाई गई थीं। भदैनी के पार्षद गोविंद शर्मा ने नगर निगम के अपर आयुक्त वीके द्विवेदी और अधिशासी अभियंता एससी सिंह को को रविवार शाम घटनाक्रम की जानकारी दी। साथ ही संबधित संस्था के विरुद्ध कार्रवाई करने की भी आवाज उठाई।
अस्सी घाट के बाद के दो घाटों की सफाई का जिम्मा उठाने वाले पंजाब नेशनल बैंक के साथ दूसरी संस्थाओं के कदम पीछे खींचने के बाद दिल्ली के हंस फाउंडेशन ने इसमें रुचि दिखाई। महीने भर से फाउंडेशन की ओर से रीवा और गंगा महाल घाटों की सफाई कराई जा रही है। इस दौरान दोनों घाटों के सामने बनी मढ़ियां टूट गई हैं।
करीब चार मढ़ियों के नक्काशीदार पत्थर टूटने से घाट किनारे के लोग गुस्से में हैं। तीर्थपुरोहित त्रिलोकी नाथ दुबे, जय मां गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष बलराम मिश्र ने बताया कि सफाई के नाम पर रीवा, गंगा महल घाट पर जमकर मनमानी हो रही है।
घाटों की सीढ़ियां और मढ़ियां टूट गई हैं। जब धरोहर ही नहीं बचेगी तो फिर इस सफाई अभियान का मतलब क्या रह जाएगा। जिला प्रशासन को इस पर तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। नगर निगम के अधिशासी अभियंता एससी सिंह ने शिकायत मिलने के बाद स्थिति की जानकारी ली। उनका कहना था कि संस्था को इसकी भरपाई करनी पड़ेगी।