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जनसंख्या वृद्धि में अशिक्षा और पूर्व सरकार की नीतियां जिम्मेदार : स्वामी चिन्मयानंद

Fri, 20 Aug 2021 07:55 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

  • लोक पहल की ओर से आयोजित गोष्ठी में बोले पूर्व गृहराज्यमंत्री
  • जनसंख्या वृद्धि से शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य का खतरा बढ़ा
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गोष्ठी का दीप जलाकर उद्घाटन करते पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोक पहल अभियान के तहत वाराणसी में शुक्रवार को आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने जनसंख्या वृद्धि की चुनौतियों और उसके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने जनसंख्या वृद्धि के लिए अशिक्षा के साथ-साथ पूर्ववती सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया। कहा कि परिवार के मुखिया को शिक्षित करने के साथ ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए मानसिक रुप से तैयार करने की जरूरत है। 

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लंका स्थित मालवीय महिला महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि भारत पुरातनकाल से कर्तव्य प्रधान देश रहा है। यहां तक की गुलामी काल में भी भारत का नागरिक जनसंख्या की जिम्मेदारी को समझता था। मैकाले की शिक्षा व्यवस्था ने देश में पाश्चात्य संस्कृति को बढ़ावा दिया, जिसके परिणामस्वरूप भारत के युवाओं में संस्कार निर्माण की उपेक्षा हुई। 

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बतौर विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि से केवल शिक्षा नहीं बल्कि सुरक्षा, स्वास्थ्य का खतरा भी बढ़ गया है। डॉ. आलोक चौहान ने जनसंख्या वृद्धि को समाज में नैतिक शिक्षा के अभाव का परिणाम बताया। कहा कि पूर्ववती सरकारों की भेदभाव पूर्ण नीतिया  धर्म विशेष के लोगों को भारत में घुसपैठ के लिए प्रेरित किया, जो आज भारत की जनसंख्या वृद्धि और आतंरिक सुरक्षा का खतरा बन गया है। 

कार्यक्रम के आयोजक बीएचयू के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि भारत की जनसंख्या कौशल विहीन होने  के कारण बोझ  बन गई है। देश की नई शिक्षा नीति इस समस्या के लिए बरदान साबित होगी। अध्यक्षता करते हुए जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने विकसित राष्ट्रों ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए नीतियां बनाई हैं। जनसंख्या के समानुपात के साथ संसाधन पर भी विचार करने की जरूरत है। 
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