एसटीएफ निरीक्षक के अनुसार, कुछ ट्रक मालिकों की ओर से सूचनाएं मिल रही थीं कि एंट्री फीस के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। पूछताछ में सामने आया कि मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, बलिया समेत अन्य जिलों से ओवरलोड वाहनों को पास कराने का काम किया जा रहा था। अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। जांच में सामने आया कि ओवरलोड गाड़ियां पास कराने के एवज में प्रति ट्रक 3000 रुपये लिए जाते थे। उधर, सिपाही की गिरफ्तारी के बाद परिवहन कार्यालय की ओर से उसे निलंबित कर दिया गया। गिरफ्तारी के बाद से परिवहन कार्यालय में हलचल तेज है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि ओवरलोड गाड़ियों को पास कराने के लिए आरोपियों की ओर से परिवहन अधिकारियों की लोकेशन ली जाती थी। लोकेशन के आधार पर गाड़ियां पास कराई जाती थीं। परिवहन अधिकारियों की लोकेशन की जानकारी ट्रक चालकों व मालिकों को पल-पल दी जाती थी। सोनभद्र और मिर्जापुर समेत अन्य जिलों से गाड़ियां पास होती थीं। अवैध वसूली से जुड़ी अन्य कड़ियां भी खंगाली जा रही हैं।
ओवरलोड वाहन पास कराने वालों की सांठगांठ में दीवान हो चुका है निलंबित
वाहनों को पास कराने से लेकर अन्य कई मामलों में परिवहन विभाग चर्चा में रहा है। हाल ही में हाईवे पर ओवरलोड वाहनों को पास कराने के आरोप में दीवान योगेंद्र सिंह को निलंबित किया जा चुका है। आरोप है कि दीवान योगेंद्र सिंह वाराणसी में नौकरी करते हुए दूसरे जिलों में आरटीओ अधिकारियों की लोकेशन पासरों को देता था।
पूर्वांचल ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रमोद सिंह ने यह आरोप लगाते हुए परिवहन के अपर मुख्य सचिव, परिवहन आयुक्त समेत अन्य अधिकारियों से शिकायत की थी। डीटीसी राधेश्याम ने गोपनीय जांच कराई तो मामला उजागर हो गया। दीवान प्रकरण की जांच अयोध्या के एआरटीओ संजय सिंह कर रहे हैं। परिवहन आयुक्त ने एक माह में जांच रिपोर्ट मांगी है।