कैंट रेलवे स्टेशन के सामने रक्षा संपदा की लगभग 160 एकड़ जमीन पर हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। रक्षा संपदा अधिकारी विनीत कुमार और छावनी परिषद के मुख्य अधिशाषी अधिकारी राजीव कुमार ने इस क्षेत्र में जाकर जायजा लिया।
साथ ही मंडलायुक्त से मुलाकात कर अवैध निर्माणों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई पर चर्चा की। मंडलायुक्त ने 12 दिसंबर को सभी संबंधित विभागों की बैठक बुलाई है, जिसमें कार्रवाई की कार्ययोजना पर विमर्श किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय की 160 एकड़ जमीन को भारत सरकार ने वर्ष 1894 में नगर निगम को स्थानांतरित कर उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसका वार्षिक किराया 1657 रुपये और छह आना तय किया गया था। इसके दायरे में परेड कोठी, इंग्लिशिया लाइन, तेलियाबाग और अंधरापुल क्षेत्र आता है।
इस भूमि का मालिकाना हक रक्षा मंत्रालय के पास ही है। ऐसे में बिना अनुमति के यहां न तो नया निर्माण किया जा सकता है न ही इसका क्रय-विक्रय किया जा सकता है।
बावजूद इसके इस भू भाग में अवैध तरीके से प्लाटिंग कर कॉलोनियां विकसित होती गईं, होटल और दुकानें भी बन गई लेकिन नगर निगम ने कभी रोकने का प्रयास नहीं किया।
वर्ष 2001 से रक्षा संपदा विभाग के आग्रह पर जिलाधिकारी ने इस जमीन की रजिस्ट्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इसके बाद भी इस क्षेत्र में अवैध तरीके से होटलों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का निर्माण लगातार जारी है।