शहर के अंदर अवैध बस स्टैंड को हटाने के लिए दो-दो बार पहल हुई। इसे हटाकर आशापुर में किया गया था। कई दिनों तक बसों का संचालन हुआ। बस संचालकाें के दबाव पर इसे आशापुर से हटाकर पीलीकोठी से चलाने पर सहमति बनी, लेकिन अधिकारियों के जाने के बाद धीरे-धीरे बस स्टैंड चौकाघाट में आबाद हो गया है।
शिकायत और पत्राचार के बाद भी नहीं हटा स्टैंड
प्राचार्य प्रो. नीलम गुप्ता ने बताया कि चालकों की मनमानी का आलम यह है कि बसों को अंदर तक खड़ा कर देते हैं। मरीजों के वाहन और कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार तो हम लोगों के वाहन भी अंदर नहीं पहुंच पाते हैं। इसकी शिकायत कई बार पत्र के माध्यम से अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। महाविद्यालय के कर्मचारी जब इन्हें टोकते हैं तो वह हाथापाई पर उतर आते हैं।