बीएचयू में सोमवार को हुई कोर्ट की बैठक में बीएचयू के विकास, शोध और उपलब्धियों सहित अन्य बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिसमें सदस्यों ने इसे और उत्कृष्ट बनाने का सुझाव दिया। इस दौरान वार्षिक रिपोर्ट में आईआईटी बीएचयू का भी जिक्र करने का सुझाव सदस्यों ने दिया।
कहा कि भले ही आईआईटी का संचालन अलग हो रहा है, लेकिन यह बीएचयू का ही अंग है। बता दें कि नियमानुसार, बीएचयू की वार्षिक रिपोर्ट हर साल संसद को भेजी जाती है। यह रिपोर्ट कोर्ट की बैठक में रखे जाने के बाद सदस्यों की सहमति के बाद ही भेजी जाती है।
कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने पिछले वर्ष बीएचयू में हुए शैक्षणिक शोध एवं आधारभूत संरचना की दृष्टि से हुए विकास कार्यों की जानकारी सदस्यों को दी। साथ ही उपलब्धियां भी गिनाईं। इसमें अटल इन्क्यूबेशन सेंटर, महामना मालवीय कैंसर संस्थान, वैदिक विज्ञान केंद्र, सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के साथ ही आईएमएस में एम्स जैसी सुविधा मिलने आदि से सभी को अवगत कराया।
इस दौरान प्रवेश ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली करने से अधिक छात्रों को प्रवेश का अवसर देने सहित अन्य उपलब्धियां बताईं। एक सदस्य द्वारा बीएचयू में मैथिली सेंटर खोले जाने से पहले के फैसले की जानकारी मांगें जाने पर कुलपति ने इस दिशा में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जानकारी दी।
सांकेतिक
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बैठक में बीएचयू से प्रो. आनंद मोहन, प्रो. बच्चा सिंह, प्रो. भारतेंदु के .सिंह, प्रो. अरविंद कुमार, डॉ. संजय श्रीवास्तव, प्रो. आदित्य त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश, वसंता कॉलेज राजघाट से डा. वंदना झा, झारखंड से प्रो. एके सिंह, इलाहाबाद प्रो. असीम कुमार मुखर्जी, हरियाणा से डॉ. रामनरेश मिश्रा आदि लोगों के साथ ही रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला, वित्ताधिकारी डॉ. अभय कुमार ठाकुर, परीक्षा नियंता एमके पांडेय आदि मौजूद रहे।