बचाव पक्ष का कहना था कि इसी बात को लेकर पीड़िता और उसके साथी से आरोपियों की कहासुनी हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बीएचयू के पास मौजूद सुरक्षाकर्मियों को बुलाया। अधिवक्ताओं ने अदालत में दावा किया कि बाद में पीड़िता और उसके साथी ने आरोपियों को फंसाने के लिए झूठी कहानी गढ़कर प्राथमिकी दर्ज कराई।
इससे पहले 29 अगस्त को हुई सुनवाई में भी आरोपियों ने घटना वाले दिन बीएचयू परिसर में मौजूद होने की बात स्वीकार की थी, लेकिन छात्रा और उसके साथी की ओर से लगाए गए आरोपों से इन्कार किया था। बचाव पक्ष ने तब भी अदालत के समक्ष कहा था कि अभियोजन के पास आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।
शनिवार की सुनवाई में बचाव पक्ष ने अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपित कुणाल पांडेय, आनंद चौहान और सक्षम पटेल मौजूद रहे। मामले में अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें रखी जा रही हैं।