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आईआईटी बीएचयू: 21 दिन में मिले सात पेटेंट, 16 प्रोजेक्ट के लिए आए 9.27 करोड़ रुपये; पढ़ें- खास बातें

Thu, 20 Feb 2025 02:49 PM IST
प्रगति चंद हिमांशु, अमर उजाला, वाराणसी।

सार

आईआईटी बीएचयू को 21 दिन में 7 पेटेंट मिले। 16 पेटेंट फाइल किए गए थे। वहीं 16 प्रोजेक्ट के लिए 9.27 करोड़ रुपये आए। 6 जनवरी को दो पेटेंट, वहीं बाकी 8, 14, 16, 24 और 27 जनवरी को पांच पेटेंट की अनुमति मिली है।
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बीएचयू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईआईटी बीएचयू को 21 दिनों में सात पेटेंट, 16 प्रोजेक्ट को अनुमति और 9.27 करोड़ रुपये का ग्रांट मिला है। ये डेटा 6 से 27 जनवरी के बीच का है। वहीं इसमें एक पेटेंट ऐसा है जो कि सात साल पहले फाइल हुआ था। चार पेटेंट दो साल पहले और एक पेटेंट तीन साल पहले फाइल किया गया था। संस्थान ने जनवरी 2025 का न्यूज लेटर जारी कर जानकारी दी है। 

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बताया गया है कि संस्थान की ओर से 16 पेटेंट फाइल किए गए थे, इसमें से सात पेटेंट मिल गए हैं। 6 जनवरी को दो पेटेंट, वहीं बाकी 8, 14, 16, 24 और 27 जनवरी को पांच पेटेंट की अनुमति मिली है। सात साल पहले 1 मई 2018 को एक पेटेंट की 16 जनवरी को स्वीकृति हुई। कमरे के तापमान पर वेस्ट मटेरियल को दोबारा इस्तेमाल में लाने के लिए फैब्रिकेशन ऑफ सिरेमिक बोर्ड बनाया जाना है। 

2022 में फाइल पेटेंट पर अब मिली अनुमति

रिमोट हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए वायरलेस बॉडी एरिया नेटवर्क की मदद से फॉग कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार किया गया है। 4 जनवरी 2023 को पेटेंट टाइल किया गया था, अप्रूवल 6 जनवरी 2025 को मिला। 11 जनवरी को 2023 को बायो डिग्रेडेबल बांस का ड्रिकिंग स्ट्रॉ और उसे बनाने की तकनीक को लेकर पेटेंट फाइल किया गया था। बांस से स्ट्रॉ बनाया जाएगा। ट्रैफिक लाइट की पहचान के लिए चौकस इनकोडर-डीकोडर बेस्ड सिस्टम पर 14 जनवरी को दो साल के बाद पेटेंट मिला। इसे 14 दिसंबर 2022 को फाइल किया गया था।

5 सितंबर 2022 को पॉली-विन्यलडिन फ्लूरॉईड और हाईड्रेटेड एंटीमनी पेंटोऑक्साईड आधारित नैनो कंपोजिट फिल्म बेस्ड कैपेटिव एनर्जी स्टोरेज डिवाइस बनाने के लिए पेटेंट फाइल किया गया था। स्वीकृति 8 जनवरी को मिली। पॉलिमर पार्टिकल कंपोजिट रेडिएटिव कूलिंग कोटिंग के लिए 24 जनवरी को पेटेंट मिला है, जबकि आवेदन 4 जनवरी 2023 को किया गया था। कोपॉलिमेरिक फॉर्मूलेशन और इसे बनाने की तकनीक को लेकर 27 जनवरी को पेटेंट मिला, जबकि 3 जुलाई 2023 को फाइल किया गया था।
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जल प्रबंधन के लिए मिले 4.35 करोड़

जनवरी में ही 16 प्रोजेक्ट मिले हैं। इसमें सबसे ज्यादा इसरो के सात, आईसीएमआर के तीन, डीआरडीओ के दो और एनएमसीजी, सीजीआरवीवीएनएल, मीट, जीएमडीसी के 1-1 प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। सबसे ज्यादा फंड 4 करोड़ 35 लाख रुपये एनएमसीजी के प्रोजेक्ट को मिला है। इसमें वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट के लिए डिसिजन सपोर्ट सिस्टम तैयार करना है। इसके बाद शहरी स्माई सॉल्यूशन प्रोग्राम और केमिकल प्लांट के लिए डिजिटल ट्विन तैयार कराने के लिए 1 करोड़ 10 लाख रुपये मिले हैं। बाकी प्रोजेक्ट को डेढ़ लाख से लेकर 97 लाख तक फंड मिले हैं।
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