स्वस्थ पत्तियां और पौधों की वृद्धि होगी
अध्ययन के अनुसार हरित विधि से तैयार और जिंक ऑक्साइड नैनो कणों से ट्रीट कराए गए गेहूं के पौधे सामान्य परिस्थितियों में स्वस्थ बने रहते हैं लेकिन रोगाणुओं के संपर्क में आने पर उनमें ज्यादा मजबूत प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। ऐसे पौधों में बेहतर वृद्धि, ज्यादा स्वस्थ पत्तियां, बेहतर प्रकाश संश्लेषण क्षमता और सशक्त जैव-रासायनिक रक्षा प्रतिक्रियाएं देखी गईं।
सूक्ष्म विश्लेषण से संकेत मिला है कि यह प्रभाव एपिजेनेटिक परिवर्तनों यानी कि डीएनए का सीक्वेंस बदले बिना ही जीन की कार्यप्रणाली और बदलावों का अध्ययन किया जाता है। विशेष रूप से प्रमुख रक्षा जीनों के नियामक क्षेत्रों में डीएनए मिथाइलेशन के बदलाव से जुड़ा है।
यह गेहूं में अंतर-पीढ़ी प्रतिरक्षा स्मृति की उपस्थिति का संकेत देता है। डॉ. प्रशांत सिंह के अनुसार, यह शोध इको फ्रेंडली खेती की तकनीक विकसित की जा सकती है। इस शोध टीम में निधि यादव, बंधना देवी, पी. थिरुनारायणन, संजीव कुमार, चंदन उपाध्याय और डॉ. प्रशांत सिंह शामिल हैं।