IIT BHU convocation 2025: इसरो चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा कि सैटेलाइट की भूमिका ऑपरेशन सिंदूर में भी रही। वहीं विकसित भारत @2047 में स्पेस सेक्टर की भूमिका बड़ी होगी।
आईआईटी बीएचयू के 14वें दीक्षांत समारोह में 62 मेधावियों को 123 मेडल पहनाने के बाद इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में एयरक्राफ्ट के साथ ही देश की सैटेलाइट का भी बड़ा हाथ था। सैटेलाइट्स ने काफी सटीकता के साथ काम किया था। इसरो आम आदमी से लेकर सामरिक स्थिति को भी मजबूत करने पर काम कर रहा है।
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इसरो प्रमुख ने कहा, 90 के दशक में हाई पावर रॉकेट बनाने में असफलता तो मिली, लेकिन मैं उन देशों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने भारत को क्रायोजेनिक इंजन और तकनीक देने से मना किया। इसका फायदा ये हुआ कि अध्ययन और रिसर्च कर भारत हाई पावर रॉकेट जीएसएलवी बनाने में सक्षम हो गया और चंद्रयान 3 में इसका इस्तेमाल हुआ।
डॉ. नारायणन ने कहा कि 50 साल पहले साइकिल से शुरू हुआ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का सफर चंद्रमा और मंगल ग्रह तक पहुंच गया है। अब 2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की तैयारी है। चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने और मंगल मिशन के पहले ही प्रयास में सफल होने वाला भारत दुनिया का पहला देश है। भारत ने 34 विदेशी समेत 433 सैटेलाइट को भारतीय लॉन्च व्हीकल से लॉन्च किया है। जी 20 देशों के इस्तेमाल के लिए सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहे हैं। अब हमें किसी दूसरे देश या स्पेस सेंटर की जरूरत नहीं पड़ती। चंद्रयान 3 पूरी तरह से स्वदेशी था। अगले महीने कम्यूनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे।
वैदिक मंत्र दीक्षांतसमारोहस्य मंडपे प्रवेशं करिष्यंति.....से शुरू हुआ दीक्षांत
बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में सुबह 10:30 बजे आईआईटी बीएचयू का 14वां दीक्षांत समारोह शुरू हुआ। वैदिक मंत्र के स्वर दीक्षांतसमारोहस्य मंडपे प्रवेशं करिष्यंति... पर दीक्षांत मंडल के सदस्य दर्शक दीर्घा में आए। विशिष्ट अतिथि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन और निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने मेधावियों को 123 मेडल और 1995 उपाधियां दीं। इसके बाद उपाधि धारकों को अनुशासन की शपथ दिलाई। मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार का रिकॉर्डेड वीडियो भाषण चलाया गया।
जीपीएस की तरह होगा भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम
दीक्षांत संबोधन डॉ. नारायणन ने कहा कि भारत आने वाले समय में जीपीएस की जगह अपना नेविगेशन सिस्टम बनाएगा। सात सैटेलाइट्स काम कर रहे हैं और बाकी तीन सैटेलाइट्स तैयार हो रहे हैं। नवंबर तक संचार सैटेलाइट और साल के अंत तक गगनयान लॉन्च करने की तैयारी है। देश की सुरक्षा के लिए सेना के साथ भी टेली कम्यूनिकेशन, टेली मेडिसीन और नेवीगेशन आदि पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा विकसित भारत @2047 में स्पेस सेक्टर की बड़ी भूमिका होगी। सभी एकेडमिक, रिसर्च सेंटर और स्टार्टअप मिलकर स्पेस सेक्टर में काम करें। हमारा स्पेस प्रोग्राम निखरेगा।
आपदा चेतावनी, मत्स्य पालन सहित मौसम पूर्वानुमान भी बता रहा इसरो
इसरो प्रमुख ने कहा कि चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5, 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन और गगनयान-3 मिशन होगा। उन्होंने बताया कि दूरसंचार, टेलीमेडिसिन, आपदा चेतावनी, मत्स्य पालन और मौसम पूर्वानुमान जैसे अंतरिक्ष के इस्तेमाल ने देशवासियों के जीवन में बड़े लाभ पहुंचाए हैं।
यहां के पूर्व छात्र विश्व भर में दे रहे योगदान
इसरो प्रमुख ने 2025 बैच के स्नातकों और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। साथ ही उनके माता-पिता, शिक्षक और संस्थान के कर्मचारियों की भूमिका को सराहा। डॉ. नारायणन ने आईआईटी बीएचयू की परंपरा को ज्ञान का मंदिर बताया। कहा कि यहां के पूर्व छात्र विश्व भर की उद्योग और प्रौद्योगिकी में योगदान दे रहे हैं। स्नातकों से सतत सीखने, रचनात्मकता, आत्मविश्वास, टीम वर्क और नेतृत्व कौशल अपनाने के साथ-साथ समाज को लौटाने की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री ने बीएचयू को बताया जीवित विश्वविद्यालय
रिकॉर्डेड वीडियो में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बीएचयू को “जीवित विश्वविद्यालय” बताया। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी और इसकी शाश्वत दार्शनिकता एजुकेशन इस कैरेक्टर को याद किया। बताया कि यह संस्थान प्राचीन ज्ञान को आधुनिक नवाचार में बदलते हुए इंजीनियर, वैज्ञानिक और नवप्रवर्तकों की पीढ़ियों को तैयार करता है, जिन्होंने भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और मूल्यों का इस्तेमाल समाज के कल्याण के लिए करें और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान दें।