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काशी के मर्ज की दवा कागजों में ही ढूंढ रहे अफसर

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वाराणसी। जनसमस्याओं के निस्तारण के लिए बनाई गई आईजीआरएस को लेकर वाराणसी के अधिकारी संजीदा नहीं हैं। ज्यादातर मामलों में अधिकारी मौके पर न जाकर कागजों में कार्रवाई कर निस्तारण करते हैं। इसी का असर जुलाई महीने की आईजीआरएस रैंकिंग पर पड़ा है। वाराणसी की रैंकिंग 61 वें स्थान पर पहुंच गई है। प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों में ज्यादातर मामले राजस्व से जुड़े होते हैं, जिसमें मौके पर जांच कर रिपोर्ट लगानी होती हैं। मगर, ज्यादातर मामलों में मौके पर नहीं जाने से निस्तारण में दिक्कत आती हैं।
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आईजीआरएस की रैंकिंग खिसकने के बाद रविवार को जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बैठक कर अधिकारियों को शिकायतों के निस्तारण में संजीदगी की हिदायत दी है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के सहायक विकास अधिकारी शीतला पाण्डेय एवं चोलापुर के सहायक विकास अधिकारी के स्तर पर भी कई शिकायतें लंबित हैं। विकास खंड आराजीलाईन, सेवापुरी के पूर्ति निरीक्षकों द्वारा समय से निस्तारण नहीं होने के कारण काफी शिकायतें लंबित हैं। इसके लिए पूर्ति निरीक्षक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। उधर, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि आईजीआरएस शिकायतों की मॉनिटरिंग कराई जा रही है। अब सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय की गई है और लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इन विभागों में लंबित हैं शिकायतें
वर्तमान में 306 शिकायतें ऐसी हैं, जिनका निस्तारण नहीं किया जा सका है। इसमें सिंचाई विभाग की 23, तहसील राजातालाब तहसील की 29 और लोक निर्माण विभाग की 63 एवं नगर निगम के पास 100 से अधिक शिकायतें लम्बित हैं। अन्य विभागों में कुछ शिकायतें लंबित हैं।
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