विश्व हीमोफीलिया दिवस आज
बीएचयू अस्पताल के हीमोफीलिया यूनिट में 717 पीड़ितों का चल रहा इलाज
जन्म से लेकर 60 साल तक के लोग इस बीमारी से प्रभावित
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। अगर आपको कहीं चोट लग जाए या शरीर पर कहीं किसी तरह छिल जाए और खून निकलना न बंद हो तो इसको नजरअंदाज न करें। हीमोफीलिया की वजह से ऐसा होता है। अगर किसी को यह समस्या महसूस हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाकर सलाह लेनी चाहिए। समय से उपचार कराने पर इस बीमारी से मुक्ति मिल सकती है। बीएचयू में चलने वाली हीमोफीलिया यूनिट में ऐसे 717 लोग हैं, जिनको परामर्श के साथ ही जरूरी फैक्टर (हीमोफीलिया के इलाज में लगने वाली दवा) भी लगाई जा रही है।
हीमोफीलिया के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। बीएचयू में चलने वाली हीमोफीलिया यूनिट में फैक्टर 8 लगवाने वालों की संख्या 598 है जबकि 119 को फैक्टर 9 लगाया जाता है। इसमें नवजात बच्चों से लेकर 60 साल से अधिक उम्र वाले हैं। बीएचयू ब्लड बैंक की ओर से फैक्टर चढ़ाने में मदद की जाती है।
अनुवांशिक भी है हीमोफीलिया
बीएचयू मेडिसिन विभाग के डॉ. नीलेश का कहना है कि हीमोफीलिया अनुवांशिक बीमारी है। सबसे अधिक खतरा पुरुषों में देखने को मिलता है। बीएचयू अस्पताल में ओपीडी हाॅल में पहले तल पर बुधवार और शनिवार को ओपीडी चलती है।
लक्षण
शरीर में चोट के उपचार के बाद भी खून का बहना न बंद होना।
बार-बार नाक से खून बहना।
डिलीवरी के बाद नवजात के सिर से खून दिखाई देना।
टीका लगवाने के बाद असामान्य रक्तस्राव होना।