मृतक के गमजदा रिश्तेदार
- फोटो : amar ujala
सराफा कारोबारी वर्मा परिवार और लालजी के बीच मिल्कोपुर स्थित सड़क किनारे की 20 बिस्वा जमीन पर काबिज होने के लिए एक अरसे से विवाद के साथ ही मुकदमेबाजी चल रही है। इस जमीन की देखरेख मुन्नीलाल यादव करता है। बदले मुन्नीलाल को प्रतिमाह पांच हजार रुपया मिलता था।
क्राइम ब्रांच के अनुसार वर्मा परिवार ने मुन्नीलाल को लालच दिया कि यदि वह उनके राह के रोड़े लालजी को रास्ते हटवा दे तो उसे सड़क किनारे की कीमती जमीन और रुपया दिया जाएगा। इससे उससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी। इसी लालच में मुन्नीलाल के बेटे सोनू ने पिता-पुत्र की हत्या की साजिश रची और वारदात को अंजाम दिया।
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इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि वारदात से जुड़े प्रत्येक बिंदु के आधार पर हमारी तफ्तीश जारी है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और वारदात का जल्द खुलासा होगा। हिरासत में लिए गए पांचों नामजद आरोपियों से एडीजी जोन पीवी रामाशास्त्री और आईजी रेंज विजय सिंह मीना ने भी पूछताछ की।
पुलिस ने लालजी यादव के घर के समीप से एक साइकिल बरामद की है। बताया गया है कि बरामद साइकिल वारदात के आरोपी मुन्नीलाल यादव की है। उधर, लालजी के भतीजे 10 वर्षीय मंजीत ने बताया कि मंगलवार की रात जब विस्फोट हुआ तो वो भाग कर सड़क पार स्थित अस्पताल में गया था। वहां फुल्ली सोया हुआ था। उसको जगाया और बताया कि फूफा को खून बह रहा है लेकिन उसने कहा कि चुपचाप सो जाओ, सुबह देखा जाएगा।
लालजी की पत्नी प्रभावती देवी अपने बेटे सत्यप्रकाश और बहनोई बंशीनारायण यादव के साथ गुरुवार की देर रात मुंबई से पचरांव स्थिति पैतृक घर पहुंची। घर का माहौल गमगीन और महिलाओं को रोते देख पहले तो प्रभावती देवी को कुछ समझ में ही नहीं आया। उसने पति और बड़े बेटे के बारे में पूछा तो श्यामजी फफक कर रोने लगे।
जब उसे लालजी और अजय की हत्या के बारे में बताया गया तो वो अचेत हो गई। होश आने पर वह बार-बार यही कह रही थी कि कितनी अभागिन हूं मैं कि पति और बेटे का चेहरा भी नहीं देख सकी। प्रभावती का बिलखना देख उसे ढांढस बंधा रही परिवार की महिलाओं की भी हिम्मत जवाब दे रही थी। उधर, उसके बेटे सत्यप्रकाश को भी परिजन बड़ी ही मशक्कत से संभाला।
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व्यापारी लालजी यादव और उनके बेटे अजय की सनसनीखेज तरीके से की गई हत्या से मिल्कोपुर ही नहीं आसपास के गांवों के ग्रामीण भी दहल गए हैं। पिता-पुत्र की हत्या के दूसरे दिन गुरुवार को मिल्कोपुर गांव में सन्नाटा पसरा रहा। चट्टी-चौराहों की चाय-पान की दुकानों पर वारदात की भयावहता की ग्रामीण चर्चा करते रहे। गांव में तीन थानों की फोर्स और एक कंपनी पीएसी के जवान तैनात रहे।
इसके साथ ही अलग-अलग जांच एजेंसियां घटनास्थल का मुआयना करती रहीं। उधर, इससे पहले बुधवार की रात हरिश्चंद्र घाट पर पिता-पुत्र का अंतिम संस्कार किया गया, जहां मुखाग्नि लालजी के छोटे भाई श्यामजी ने दी।
पिता-पुत्र की हत्या मिल्कोपुर के साथ उनके पैतृक गांव पचरांव के अलावा शंकरपुर, मढ़नी, महासीपुर और तोफापुर के अलावा आसपास के अन्य गांवों के ग्रामीणों की जुबान पर छायी हुई है। वारदात से भयभीत ग्रामीणों ने घरों के बाहर सोना बंद कर दिया है। ऐसी वारदात नक्सल प्रभावित इलाकों में ही सुनाई देती थी।
मिल्कोपुर और आसपास के ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि बलुआ घाट पर पुल जाने के बाद चंदौली के रास्ते होते हुए नक्सलियों ने तो पिता-पुत्र की हत्या नहीं की है। इस बीच नक्सली हमले से जुड़ी घटनाओं को भी ग्रामीण एक-दूसरे से साझा करते रहे। वहीं, पुलिस ग्रामीणों को आश्वस्त कर रही थी कि ऐसा कुछ भी नहीं है और सभी लोग निडर होकर अपने घर में रहें।
मृतक लालजी यादव का भाई
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व्यापारी लालजी यादव के रिश्तेदारों का कहना है कि मिल्कोपुर में जहां उनका मकान और दुकान है उसके पीछे महासीपुर गांव की आराजी में लगभग 10 बीघा जमीन कभी कृष्णा इंडस्ट्रीज के नाम हुआ करती थी। इस जमीन के मालिक सिगरा क्षेत्र निवासी बासदेव सिंधिया ने पटाखा का कारखाना लगा रखा था।
1986 में फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए थे। बाद में बासदेव ने इस जमीन को चौक क्षेत्र के सराफा कारोबारी किरनचंद वर्मा को बेच दी थी। इस जमीन की देखरेख लखरांव की मुन्नीलाल यादव करता था। इसे लेकर वर्षों से विवाद चल रहा है।
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रिश्तेदारों ने बताया कि किरनचंद वर्मा की जमीन महासीपुर आराजी में है और उसने सीमावर्ती गांव मिल्कोपुर की एक बीघा से ज्यादा जमीन अपनी जमीन में मिला ली है। इसे लेकर लालजी यादव सहित 20 लोग ने पैमाइश कराई और मामला न्यायालय में भी चल रहा है। सभी 20 लोगों के मुकदमे की अगुवाई लालजी करते थे।
इसे लेकर दो माह पूर्व कहासुनी हुई थी और मुन्नीलाल के बेटे सोनू ने बम से उड़ा देने की धमकी दी थी। मिल्कोपुर गांव के जमीन विवाद को पुलिस यदि गंभीरता से लेकर समय रहते ठोस उपाय की होती तो शायद ऐसी नौबत न आती। पिता-पुत्र की हत्या के बाद मिल्कोपुर और आसपास के ग्रामीणों की जुबान पर यह बात छायी हुई है। ग्रामीणों में खासा आक्रोश व्याप्त है।
सभी का कहना है कि इतनी बड़ी साजिश कर विस्फोटक पदार्थ से धमाका किया गया और स्थानीय खुफिया इकाइयों को भनक तक नहीं लगी। खुफिया तंत्र एक बार फिर से पूरी तरह विफल रहा और अपराधी अपने मंसूबे में सफल रहे। ग्रामीणों ने मांग की है कि आरोपियों को तो सजा दी ही जाए, इसके लिए कसूरवार पुलिसकर्मियों और खुफिया विभाग के कर्मचारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।