प्रधानमंत्री ने कहा था कि सबसे अधिक अफसर आपके यहां का गांव दे रहा है। इससे ग्रामीण उत्साहित हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने गांव का नाम लिया और उपलब्धि भी बताई। राजनीति से कोसों दूर गांव के लोग कहते हैं कि इसमें कोई दोराय नहीं है कि पिछले पांच वर्षों में बहुत विकास हुआ है।
प्रणव सिंह कहते हैं कि पहले केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकारें होती थीं तो विकास रुकता था। अब दोनों जगह भाजपा की सरकार होने का लाभ मिला और खूब विकास हुआ। हालांकि यह भी कहते हैं कि अभी स्वास्थ्य और शिक्षा के के क्षेत्र में बहुत काम होना बाकी है।
वीरेंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, प्रेमलाल सिंह, धीरीन सिंह, दुखहरन सिंह कहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के अलावा हमें खुद भी अपने स्तर से काम करना होगा। हम ऐसा कर सके तो जौनपुर में कई माधोपट्टी गांव होंगे। इस जिले से कई अफसर निकलेंगे और निकलने ही चाहिए।
1995 में विनय सिंह आईएएस बने और बिहार के मुख्य सचिव बने। 1980 में आशा सिंह, 1982 में ऊषा सिंह और 1983 में इंदु सिंह भी सिविल सर्विस में चुनी गईं। गांव की ही बुजुर्ग लालमनी कहती हैं कि इन सब के अफसर बनने के पीछे माताओं की भूमिका बहुत अहम है।