जुलूस में सबसे आगे शूपर्णखा व खरदूषण के पुतले के साथ ही बैंड-बाजा तथा काली-दुर्गा के स्वरूप शामिल थे। इसके साथ ही हाथी, घोड़े, ऊंट व तलवार भांजती काली व दुर्गा के स्वरूप चल रहे थे। नक्कटैया में वाराणसी के अलावा प्रयागराज, मिर्जापुर, चंदौली सहित पूर्वांचल के अन्य जिलों से दर्जनों लाग, विमान व स्वांग भी शामिल थे।
जुलूस में बरसों पुराना बुढ़िया-बुढ़िया के चेहरे बच्चे-बड़ों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। मेला क्षेत्र में विद्युत की सजावट की गई थी। रामजी की लीला में उनके जीवन से जुड़े विभिन्न लाग-विमानों के साथ ही श्रीकृष्ण की रासलीला और देवाधिदेव महादेव की झांकी भी सजी।
नक्कटैया का संयोजन समिति के प्रधानमंत्री एडवोकेट कन्हैयालाल यादव, व्यास पंडित दयाशंकर त्रिपाठी, केवल कुशवाहा, निखिल त्रिपाठी, पंकज त्रिपाठी, शिवम अग्रहरि आदि ने किया।