दहेज हत्या के मामले में वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश शैली राय ने अभियुक्त पति को दोषी पाने पर 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं, इस मामले के अन्य आरोपी ससुर बापी दास, सास ज्योत्सना व दादी सास माया दास को दोषी पाने पर सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
मुर्शिदाबाद जनपद के मूल निवासी और जंगमबाड़ी में रहने वाले वादी शिशु बागदी ने छह अगस्त 2014 को लक्सा थाने में तहरीर दी थी। तहरीर में कहा था कि उन्होंने अपनी पुत्री लोतिका की शादी दो माह पूर्व औरंगाबाद निवासी बापी दास के पुत्र समीर बागदी के साथ की थी।
आरोप था कि शादी के बाद से ही पति समीर और ससुराल के अन्य लोग दहेज में 40 हजार रुपये की मांग करते हुए लोतिका को प्रताड़ित करने लगे। इस बीच लोतिका बागदी गर्भवती हो गई।
06 अगस्त 2014 को वादी को सूचना मिली कि ससुराल वाले दहेज के लिए उनकी बेटी की हत्या कर दिए हैं और शव अस्पताल में पड़ा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लोतिका की मौत जहर खाने की वजह से होने की पुष्टि की गई।
अदालत में अभियोजन की तरफ से डीजीसी अनिल कुमार सिंह, एडीजीसी सत्यनारायण गौतम व सहयोगी सर्वेंद्र सिंह ने पक्ष रखते हुए छह गवाहों को परीक्षित कराया।