एडीसीपी प्रबल प्रताप सिंह के अनुसार पूछताछ के दौरान सामने आया कि न्यायालय और पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से अरविंद उपाध्याय, उसके पिता लक्ष्मी उपाध्याय और मां राधिका देवी ने आपस योजना बनाई।
षड्यंत्र के तहत बेटे अरविंद को पिता ने पहले अपनी संपत्ति से बेदखल किया, जिससे कि न्यायालय द्वारा प्रियंका को मकान में रखने के संबंध में आदेश पारित किया था, ताकि प्रियंका को मकान में हिस्सा न देना पड़े। न्यायालय की बात को छिपाकर अरविंद के परिजनों ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर साल 2020 में बेनीपुर स्थित मकान को बेच दिया। इसके बाद अरविंद गायब हुआ और उसके पिता लक्ष्मी ने थाने में उसकी गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कराया।
एडीसीपी ने बताया कि परिजन योजनाबद्ध तरीके से अरविंद को न्यायालय और पुलिस से छिपाते रहे और लगातार न्यायालय के समन व गैर जमानती वारंट की अवहेलना की। गुमशुदा की बरामदगी के प्रयास के क्रम में पुलिस के समक्ष भी सही तथ्य को बार-बार छिपाया एवं झूठी सूचना देते रहे।