पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक ऐसा गांव भी है जहां 100 से अधिक लोग दिव्यांग हैं। इस गांव की आबदी मात्र पांच हजार है। यहां पर बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक दिव्यांग मिलेंगे। जिले के सेवापुरी ब्लॉक के ग्रामसभा पूरे में कई बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक दिव्यांग हैं।
करीब छह साल पहले एक टीम गांव में जाकर जांच की थी। इसके बाद कोई प्रशासनिक या स्वास्थ्य टीम यहां नहीं आई। कई परिवार ऐसे हैं जिसमें सभी दिव्यांग हैं। किसी तरह यहां लोगों की जिंदगी खिसक रही है। पूरे गांव की अजीब स्थिति है।
यहां बच्चे जन्म के समय तो ठीक रहते हैं लेकिन आगे ठीक रहेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है। विकलांगों की हालत यह है कि अधिकांश तो काम करने लायक नहीं है। दिव्यांग होने का प्रमुख कारण क्या हैं, इस बारे में किसी को पता नहीं चल पा रहा है। यहां तक कि चिकित्सक भी इससे अनभिज्ञ हैं।
63 लोग तो ऐसे हैं जिन्हें दिव्यांग पेंशन मिलती है जबकि एक दर्जन से अधिक लोगों के पास प्रमाणपत्र न होने से वे पेंशन के हकदार नहीं माने जा रहे। इसी गांव के दिव्यांग कमला शंकर पटेल (58) का कहना है कि हमारे क्षेत्र से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सांसद हैं हम लोगो को काफी उम्मीद है कि वे जरूर कुछ करेंगे।
गांव की आबादी करीब 6 हजार है। करीब 34 सौ मतदाता हैं। मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे से सटा पूरे गांव की ओर शायद शासन प्रशासन की नजर नहीं पड़ी।
सीएमओ डॉ. वीबी सिंह का कहना है कि गांव में दिव्यांग लोगों की हर संभव सहायता की जाएगी। इसके लिए खुद विभागीय अधिकारियों के साथ जल्द ही गांव जाकर ग्राम प्रधान सहित लोगों से बात की जाएगी। जरूरत पड़ने पर जांच शिविर लगाकर लोगों की जांच भी कराई जाएगी।
ग्राम प्रधान सुभाष मौर्य के अनुसार दिव्यांगों को बुनियादी सुविधाएं दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। गांव में लोग कैसे इसकी चपेट में आ रहे हैं अधिकारियों से कहकर इसकी जांच कराई जाएगी।