सौंदर्यीकरण के नाम पर दो करोड ़रुपये खर्च करने के बाद भी पुष्कर कुंड में सीवर का गंदा पानी बजबजा रहा है। न जल कुंभी निकल पाई न कचरा। मोहल्ले की सीवर लाइनों को बंद किए बिना बनाई जा रही रिटेनिंग वाल एक बार ढह चुकी है। पुराणों में इस कुंड की महिमा गंगा के बराबर पावन बताई गई है। आस्था इस कदर जुड़ी है कि लोग पुष्कर कुंड की मिट्टी और जल से ही किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करते हैं लेकिन अब इसमें लोग स्नान करना तो दूर, पशु भी प्यास नहीं बुझा सकते।
असि नदी के जल स्रोत के रूप में पुष्कर कुंड में स्नान के लिए मेला लगता रहा है। इस कुंड में स्नान से पुष्कर का पुण्य अर्जित होता है लेकिन वर्षों से यह सीवर और कचरे से भर गया है। कुंड के तट पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। भवनों की सीवर लाइन इसी कुंड में जोड़ दी गई है। कुंड के जीर्णोद्धार की योजना पर काम छह दिसंबर 2012 को कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने शुरू कराया था।
3.46 करोड़ रुपये की लागत से इस पर काम तो शुरू हुआ लेकिन मानकों का पालन न होने से हालात नहीं सुधर सके। चार वर्ष से कुंड पर काम हो रहा है। कुंड के चारों तरफ बनाई जा रही रिटेनिंग वाल पिछली बारिश में ढह गई। अब सीएंडडीएस के इंजीनियर उसे तोड़वाकर छोटी दीवार नए सिरे से बनवा रहे हैं। कुंड का भीटा इस तरह से बनाया गया है कि जगह-जगह उखड़ गया है। वहां ऊबड़-खाबड़ पत्थर बिछाकर छोड़ दिए गए हैं।