गंगा में सैलानियों के लिए क्रूज संचालन की उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की योजना जून से परवान चढ़ सकती है। इसकी राह में आ रही कछुआ सेंचुरी की बाधा के जल्द दूर होने की उम्मीद है। कछुआ सेंचुरी में क्रूज संचालन के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर मुख्य वन्य जीव संरक्षक ने जो आपत्तियां लगाई थीं, पर्यटन विभाग ने उसका जवाब भेज दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वन विभाग की हरी झंडी मिलते ही क्रूज संचालन की कार्ययोजना पर काम शुरू हो जाएगा।
पर्यटन विभाग ने मुख्य वन्य जीव संरक्षक कानपुर से कछुआ सेंचुरी में क्रूज चलाने की अनुमति मांगी थी। साथ ही, जीवों को कोई नुकसान न पहुंचे इसके लिए सभी जरूरी उपाय करने का वायदा जाहिर किया था। मुख्य वन्य जीव संरक्षक ने क्रूज की संख्या के साथ कुछ जानकारियां मांगी थीं, जिनका जवाब दे दिया गया है। मंजूरी मिली तो फिलहाल पर्यटन विभाग दो क्रूज संचालित करेगा। 15 करोड़ की लागत वाले इन दोनों क्रूज के निर्माण की डीपीआर तैयार की जा चुकी है।
ये क्रूज रामनगर से राजघाट के बीच चलेंगे। घाटों के सामने से गुजरते वक्त उन पर क्रूज से लेजर लाइट डाली जाएगी। क्रूज में बैठे सैलानियों और श्रद्धालुओं को ऑटो एनाउंस सिस्टम से गंगा और संबंधित घाट की संपूर्ण जानकारी दी जाएगी। ये क्रूज 45 सीटर होंगे। इनके संचालन के लिए दो जेट्टी भी बनाई जानी है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्रा ने कहा कि मुख्य वन्य जीव संरक्षक को जवाब उपलब्ध करा दिया गया है। जल्द पहल की उम्मीद है।