यूपीआई के जरिये रकम को निकाल लेता था। पैसे लगाने वाले अपना घोड़ा चुनकर बेट लगाते थे। रिजल्ट आने पर जीते लोगों का पैसा वापस कर देते हैं और जो लोग हार जाते हैं उनका पैसा रख लेते हैं। रेस कोर्स के रिजल्ट indiarace.com नामक वेबसाइट पर देख लेते हैं।
आरोपी राघवेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि पिछले एक साल से महाकाल ग्रुप से जुड़ा था। एक मोबाइल नंबर से एक व्यक्ति को बोर्ड भेजा जाता है। जिसे ग्रुप में फारवर्ड कर देते हैं। पीड़ित अमोल ने भी व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़कर बेटिंग किया था। उसने चालाकी से बेट जीतने वालों की फोटो अपने व्हाट्सएप पर लगाकर जीत की रकम खाते में ले ली।
कोविड के दौरान रेस हार्स बेटिंग एप से जुड़ा, गोवा में ली ट्रेनिंग
गोवा में कर्मा ग्रुप में नौकरी के दौरान मैनेजर अजव वाधवानी के साथ मुंबई आवाजाही करता था। उसके साथ रेसकोर्स भी जाता था। यही से हॉर्स रेसिंग का आइडिया मिला। कोविड के समय व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें अजय वाधवानी के माध्यम से जुड़ गया था, हॉर्स रेस पर पैसा लगाया था। वहीं से जानकारी हुई। एके रेसिंग ग्रुप 2020 में बनाया गया था, पिछले 2 महीने से देख रहा हूं। बेटिंग में पवन शर्मा के कहने पर लगाया। पवन शर्मा के बताए गए अकाउंट में आगे भेजकर बेटिंग में लगा देता था।