उनके गीत गुनगुनाती हैं व्रती महिलाएं
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके झुके, ए करेलु छठ बरतिया से झांके झुके। कांचे ही बांस के बहंगिया...। शारदा सिन्हा द्वारा गाए छठ गीत हर साल देशभर में घाटों पर गूंजते हैं। व्रती महिलाएं भी घर से लेकर घाट तक उनके छठ गीत गुनगुनाती हैं। पद्मभूषण शारदा सिन्हा के गीत ऐसे हैं जो छठ पूजा करने वालों को उत्साह और आस्था से भर देता है।
इनकी भी सुनें
लोकगीत जगत का दैदीप्यमान नक्षत्र हमेशा के लिए अस्त हो गया। उन्होंने अपने सुरों से भोजपुरी जगत को जो सुर दिया उसकी मिठास अनंत काल तक बनी रहेगी। -पंडित छन्नू लाल मिश्र, पद्म विभूषण
शारदा सिन्हा ने अपनी गायकी से एक अलग पहचान बनाई थी। लोकगीत की परंपरा को जीवंत रखने और उसके संवर्धन के लिए उन्होंने जो प्रयास किया, उसे हमेशा याद रखा जाएगा। - भरत शर्मा व्यास, लोकगायक