केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि काशी शास्त्रार्थ परंपरा का विमर्श केंद्र है। यहां की प्रामाणिकता कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने सभी अतिथियों को बुके, शाल, श्रीफल और स्मृति चिह्न दिया। बीज वक्तव्य भारत अध्ययन केंद्र के आचार्य प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी ने दिया। सारस्वत अतिथि आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. पीके जैन और अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के सचिव डा. बालमुकुंद पांडेय रहे।