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Holi 2020: होलिका दहन से होगा रोग-दोष का नाश, कौन सी राशि और जन्मतिथि वाले किस रंगे का करें प्रयोग

Mon, 09 Mar 2020 03:03 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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होली 2020 - फोटो : Amar Ujala
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होलिका दहन पर इस बार भद्रा काल की बाधा नहीं होगी। फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होलिका दहन के दिन भद्रा काल सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर में ही समाप्त हो जाएगा। प्रदोष काल शाम को 6:30 से 7:20 बजे तक और पूर्णिमा तिथि रात 11:18 बजे तक रहेगी।

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इसलिए 11 बजे से पहले की होलिका दहन शुभ होगा। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि होलिका दहन पर बनने वाले वाले संयोग से कोरोना वायरस के प्रभाव में भी कमी आएगी। काशी विद्वत परिषद के डॉ. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, 9 मार्च को सोमवार और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र होने से ध्वज योग बन रहा है। यह यश, कीर्ति और विजय दिलाएगा।

वहीं सोमवार को पूर्णिमा तिथि होने से चंद्रमा का प्रभाव रहेगा। स्वराशि स्थित बृहस्पति की दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी, जिसके कारण गज केसरी योग भी बन रहा है। इस मुहूर्त में होलिका दहन से रोग, शोक और दोष के नाश के साथ ही शत्रुओं पर विजय मिलेगी।
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ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि पूर्णिमा तिथि रविवार को अर्द्धरात्रि के पश्चात 3:04 बजे लगेगी और 9 मार्च को 11:18 बजे तक रहेगी। वहीं दो मार्च से आरंभ हुआ होलाष्टक नौ मार्च को समाप्त हो जाएगा। काशी में होली के दिन चौसट्टी घाट पर विराजमान चौसट्टी देवी के दर्शन का विधान है। चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 मार्च को अर्द्धरात्रि 11:18 बसे आरंभ होगी और 10 मार्च को शाम 7:24 मिनट तक रहेगी।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि 9 मार्च को भद्रा का वास मृत्युलोक यानी पृथ्वी पर रहेगा, लेकिन भद्रा काल सुबह 6:37 से शुरू होकर दोपहर 1:15 बजे तक ही रहेगा। शाम को प्रदोष काल में होलिका दहन के समय भद्राकाल नहीं होने से होलिका दहन शुभ फ ल देने वाला रहेगा।

होलिका पूजन का विधान
ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार, होलिका पूजन में रोली, अक्षत, पुष्प, हल्दी, नारियल, बताशा, कच्चा सूत, गोबर के उपले एवं पूजन की सामग्री रहती है। होलिका दहन के समय परिक्रमा करने का विधान है। मान्यता है कि होलिका दहन के पश्चात होलिका की भस्म मस्तक पर लगाने से आरोग्य लाभ के साथ सुख, समृद्धि व खुशहाली में बढ़ोत्तरी होती है। 

राशियों के अनुसार करें रंगों का चयन
राशियों के ग्रहस्वामियों के अनुसार रंगों का इस्तेमाल किया जाए तो जीवन में सुख, समृद्धि बनी रहेगी।
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इन रंगों का करें इस्तेमाल 
मेष- लाल, गुलाबी व नारंगी
वृष- सफेद व क्रीम
मिथुन-हरा व फिरोजी
कर्क- सफेद व क्रीम
सिंह- केसरिया, लाल व गुलाबी
कन्या-हरा व फिरोजी
तुला-सफेद व हल्का नीला
वृश्चिक-नारंगी, लाल व गुलाबी
धनु-पीला व सुनहरा
मकर-भूरा, स्लेटी व ग्रे
कुंभ-भूरा, स्लेटी व ग्रे
मीन-पीला व सुनहरा

इन रंगों से करें परहेज
मेष-काला, नीला व हरा
वृषभ-हरा व लाल
मिथुन-लाल, नारंगी, पीला
कर्क-हरा, काला, नीला,
सिंह-नीला, काला, हरा
कन्या-पीला, लाल, नारंगी
तुला-हरा व पीला
वृश्चिक-काला, नीला, हरा
धनु-हरा, काला, नीला
मकर-लाल, हरा, नारंगी
कुंभ-नारंगी, लाल, हरा
मीन-काला, नीला, हरा

जन्मतिथि के अनुसार रंगों का इस्तेमाल
1, 10, 19, 28 - लाल, गुलाबी, केसरिया
2,11,20,29-सफेद व क्रीम
3,12,21,30-पीला व सुनहरा पीला
4,13,22, 31-सभी चमकीले, चटकीले व मिले जुले तथा साथ ही हल्का स्लेटी रंग
5,14,23- हरा, धानी व फिरोजी 
6, 15, 24-सफेद, चमकीला सफेद, आसमानी नीला
7,16, 25- चमकीला स्लेटी व ग्रे
8,17, 26- काला, ग्रे व नीला रंग
9,18,27-लाल, गुलाबी, नारंगी
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