इंटरनेट की दुनिया में आइआरसीटीसी के समानांतर चल रहे फर्जी साफ्टवेयर रेलवे की वेबसाइट से भी तेज चलते हैं। सुबह दस बजे जैसे ही रेलवे काउंटरों पर टिकटों की बुकिंग शुरू होती है, वे अपना काम करना शुरू कर देते हैं। रेलवे काउंटर पर बैठा क्लर्क जब तक यात्री का नाम और पता भरकर पूछताछ करता है। तब तक नेट पर 80 से 90 फीसद कंफर्म टिकट बुक हो जाते हैं।