लट्ठमार होली पर मिली विश्वनाथ धाम की सामग्री
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि प्रमुख तीर्थ स्थलों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को सशक्त करने के उद्देश्य से त्योहारों पर उपहार भेजने की परंपरा शुरू की गई थी। इस वर्ष काशी विश्वनाथ धाम से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की रंगारंग लठामार होली कार्यक्रम के लिए सुगंधित द्रव्य, गुलाल, वस्त्र, प्रसाद आदि मिले थे। इनको भी आज रंगभरी एकादशी महोत्सव में विशिष्टता के साथ होली कार्यक्रम में अर्पित किया जाएगा।
शिव की होली से गोपियां डरीं
भगवान शिव के हृदय में आया कि वह भी होली खेलने के लिए ब्रज में पधारे। भगवान शिव के विचित्र रूप को देखकर गोपियां आश्चर्यचकित होते हुए बोलीं- अंग भभूत, गले विषमाला, लटकन बिराजै गंग, मैं कैसे होरी खेलूं या बावरिया के संग। इसके बाद भगवान कृष्ण के संकेत को पाकर भगवान शिव ने गोपी रूप धारण किया और प्रिया-प्रियतम की इस प्रिय लीला में शामिल हुए। अभी भी रंगेश्वर महादेव के रूप में मथुरा की रंगीली गली में विराजमान हैं। इसी भाव को ध्यान में रखकर बाबा विश्वनाथ को रंग भेजा गया है।