शिवपुर स्थित केन्द्रीय कारागार वाराणसी में 23 मार्च दिन रविवार को शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शिव शक्ति जन कल्याण ट्रस्ट वाराणसी के सौजन्य से होली मिलन समारोह एवं कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन। कार्यक्रम में सर्वप्रथम माँ सरस्वती की प्रतिमा के सामने वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं प्रतिमा का माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की गयी।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए यहाँ उपस्थित शिव शक्त जन कल्याण ट्रस्ट की अध्यक्षा ईशा त्रिपाठी एवं सभी कर्विजनों को वरिष्ठ अधीक्षक द्वारा माला पहनाकर,अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया। कवि सम्मेलन का आगाज कवि रविकान्त मिश्र कविता काशी की होली-शंकर खेलत होली, तथा फागुन आग लगाय दियो मन खोजत नन्द किशोर एवं काशी और माँ गंगा की महिमा से हुई।
उनके बाद अगली प्रस्तुति में सतीश मिश्र ने अपने भजन में काशी की महिमा एवं वृन्दावन आज मची होरी सुनाकर उपस्थित श्रोतागणों को भाव-विभोर कर दिया। श्रोत्राओं की फरमाईश पर होरी जो मेरे श्याम आये पलट कर अब की होरी मैं खेलूँगी डटकर सुनाया।
निखिलेश मिश्र (एस०डी०एम० अपर प्रशासक विश्वनाथ मन्दिर) ने भी अपनी कविता-परिंदा फड़फड़ाना चाहता है जख्म गहरे है दिखाना चाहता है, एवं जब ये शहर नहीं था तो गाँव सुहाना लगता था, तथा मानव को मानव कहें कैसे मानवता ही जब मूल ना हो सुनाकर श्रोत्राओं को ताली बजाने पर विवश कर दिया।
कवि सतीश मिश्र, गिरिजेश तिवारी, हजारी कीर्ति नारायण शुक्ल, शिवा मिश्र, हर्षित मिश्र, सुनील कुमार मिश्र, रिषभ सिंह,अशोक शर्मा, आदि कवियों ने अपनी प्रस्तुति से समाँ बाँध दिये। कारागार के डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार के भजन 'ओ पापी मन करले भजन' गाकर खूब वाहवाही बटोरी।
इसी क्रम में जितेन्द्र कुमार सिंह द्वारा अपने भजन जो प्रेम गली में आया नहीं से श्रोताओं का मनोरंजन किया गया। कारागार में निरूद्ध बन्दियों ने भी अपनी कविता एवं भजन की प्रस्तुति से श्रोत्राओं का खूब मनोरंजन किये। बन्दी अमरेन्द्र मिश्र, आजाद, नूर आलम, छोटेलाल कुशवाहा, अजीत यादव बालिस्टर, रंजीत गोस्वामी आदि ने एक से बढ़कर एक भजन एवं कविता सुनाया। जेल वार्डर अमरनाथ सिंह ने भी अपनी कविता से लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया।