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Holi 2020: काशी में मुस्लिम महिलाओं ने होली खेल गंगा-जमुनी की मिसाल पेश की, ढोल की थाप पर फाग गाया

Mon, 09 Mar 2020 06:54 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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मुस्लिम महिलाओं ने खेली होली। - फोटो : अमर उजाला।
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पूरी दुनिया में काशी की होली निराली है। यहां भूत भावन भगवान शिव श्मशान में चिता की भस्म से होली खेलते हैं तो काशीवासी प्रेम के रंग से न सिर्फ सराबोर होते हैं, बल्कि दुनिया भर को शांति, सौहार्द का संदेश देते हैं।

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रंगों के पर्व होली पर काशी ने दुनिया को सामाजिक समरसता का संदेश दिया। यहां सोमवार को हिंदू-मुस्लिम महिलाओं ने न केवल फाग गाया बल्कि अबीर-गुलाल और फूलों की होली खेल गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की।

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मौका था लमही स्थित सुभाष भवन में मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने ‘चला होली खेलल जाय’ कार्यक्रम का। जहां ढोल की थाप पर होली गीत और फिजाओं में रंग-बिरंगे गुलाल ने ऐसा समा बांधा कि नफरत फैलाने वालों के होश उड़ गए। ‘होली खेले रघुवीरा...’, रंग बरसे भीगे चुनार वाली... आदि गीतों पर मुस्लिम महिलाओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाया और गुलाब पंखुड़ियों के साथ होली खेली।

कार्यक्रम में महिलाओं ने होली खेले मोदी जी हिंद में, मोदी जी..., लगाइके लाल गुलाल, 370 खत्म कराए, मोदी जी..., के गीतों से पूरा भवन गूंज उठा। मुख्य अतिथि डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि होली गले मिलने का ही नहीं दिल मिलाने और दुश्मनी भुलाने का त्यौहार है।

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भारतीय संस्कृति के लिए इन मुस्लिम महिलाओं ने एक मिसाल कायम की है। वहीं मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नाजीन अंसारी कहती हैं, होली समरसता, एकता और मोहब्बत का त्योहार है। रंगों में सराबोर होने से ही हम एक होते हैं, वो चाहे राम के रंग में हो या अल्लाह की मोहब्बत में।
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