बीएचयू में इलाज मिलने से होगी बड़ी राहत
आरबीएसके हरहुआ के नोडल मेडिकल ऑफिसर डॉ. अब्दुल जावेद ने बताया कि हम गांवों में विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र सहित अन्य जगहों पर बच्चों की जांच करते हैं। इसमें जिस बच्चे के दिल में छेद की पुष्टि होती है, उसकी जांच जिला अस्पताल में करवाई जाती है। फिलहाल अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज में ही बच्चों को सर्जरी के लिए भेजा जाता है। अब जिस तरह से बीएचयू में सर्जरी करवाने की पहल शुरू हुई है, इससे काफी राहत मिलेगी।
कोईराजपुर निवासी दो साल की बच्ची अंशु पटेल को दिल में छेद की पुष्टि हुई है। आरबीएसके टीम ने जांच करवाने के साथ ही सर्जरी से पहले की प्रक्रिया भी पूरी करा दी है। पिता कुलदीप ने बताया कि अलीगढ़ जाने पर पता चला कि छह महीने बाद सर्जरी का नंबर आएगा। अगर बीएचयू में इलाज मिलने लगेगा तो बड़ी सहूलियत होगी।
भेलखा में रहने वाले पांच साल के बच्चे ऋषभ के दिल में छेद है। पिता सनी कुमार ने बताया कि हरहुआ पीएचसी में आरबीएसके टीम ने जांच कर सर्जरी करवाने की सलाह दी। कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद अलीगढ़ में संपर्क करने पर बताया गया कि अब छह महीने बाद ही नंबर आएगा। बनारस में ही समय से बच्चे का इलाज हो जाता है तो राहत होगी।
हृदय की विकृतियों की समस्याओं का जल्दी दूर होना जरूरी होता है। सर्जरी में जितना विलंब होगा बच्चे को उतनी अधिक समस्याएं होंगी। हृदय संबंधी कुछ ऐसी विकृतियां भी होती हैं, जिसमें एंजियोग्राफी से छल्ले डालकर बंद कर दिया जाता है। - प्रो. सुनील राव, बाल रोग विभाग बीएचयू