हवाओं में हलकी ठंड, मन में भोले की भक्ति और शिव बारात की मस्ती.... हर कोई झूमता-नाचता और संगीत की धुन पर थिरकते हुए चल रहा था। मौका था मैदागिन से निकले वाली एतिहासिक प्राचीन शिव बारात का। हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज से निकली शिव बारात दशाश्वमेध के डेढ़सी पुल पर समाप्त हुई। इससे पहले बाबा भोलेशंकर और माता पार्वती का विधि-विधान से पूजन अर्चन किया गया।
शिव बारात में बाबा भोले के गण के रूप में देवी-देवता, ऋषि मनि, भूत-पिशाच के साथ ही लाग विमान, हाथी, घोड़ा, ऊंट, डीजे और बैंड-बाजा चल रहा था। बारात में शामिल लोग ढोल-नगाड़े की थाप के साथ डीजे की धुन पर थिरकते हुए चल रहे थे। शिव बारात में शामिल लोगों के मिजाज में फागुनी हवाओं की मस्ती के साथ ही काशीपुराधिपति के बारात का जश्न भी था।