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#हिंदीहैंहम: बदलेंगे हालात हमारे, ये धरा भी मुस्कुराएगी, जन-जन की भाषा हिंदी जब...

Sun, 13 Sep 2020 04:30 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
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बदलेंगे हालात हमारे, ये धरा भी मुस्कुराएगी। जन-जन की भाषा हिंदी जब दिल से अपनाई जाएगी। कुछ ऐसे ही संकल्प और अभियान के साथ हिंदी का कारवां बढ़ रहा है। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान ने इसको गति दी है। हिंदी का गढ़ कही जाने वाली काशी का भी मानना है कि हिंदी अब जन-मन की भाषा होनी चाहिए। शनिवार को आयोजित वेबिनार में भी काशी के गणमान्य लोगों ने हिंदी के योगदानों पर चर्चा की और हिंदी को सिर्फ भाषा ही नहीं संस्कृति बताया।

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भाषा की समृद्धि हम सबकी जिम्मेदारी
वर्तमान में लोग बड़े गर्व से कहते हैं कि उनका बच्चा इंग्लिश मीडियम में पढ़ता है और लोग यह कहकर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। शायद उन्हें यह नहीं पता होता कि अंग्रेजी में बोलते-बोलते वे अपनी संस्कृति को भी भूलते जा रहे हैं। अब हम अपनी बातों को अंग्रेजी में रखने में ही अपना महत्व समझते हैं। हमें अपनी भाषा की समृद्ध बनाए रखने के लिए आगे आने की जरूरत है। हम हिंदी बोलते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि कि दूसरी भाषाएं नहीं आती हैं। थोड़ी-थोड़ी हर भाषा जाननी चाहिए। - पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य, संगीतज्ञ


सांस्कृतिक गौरव और स्वाभिमान की भाषा
हिंदी एक संघर्षशील भाषा है। हिंदी का जो विकास हुआ है वह संघर्षशील चेतना के दायरे में रहकर हुआ है। साथ ही प्रतिरोध और परिवर्तन की भाषा के रूप में इसका विकास हुआ है। जब हम प्रतिरोध और परिवर्तन के बाद करेंगे तो यह जानना होगा कि हिंदी सांस्कृतिक गौरव और जातीय स्वाभिमान की भाषा है। प्रतिरोध और परिवर्तन की जो बुनियादी विशेषता रही है वह इसकी स्वाभिमान को और समर्थ करती है। - प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल, हिंदी विभाग, बीएचयू
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अपना वजूद खुद बना लेती है हिंदी
हिंदी संतों की भाषा है, फकीरों की भाषा है। खेत में हल जोतने वाले किसान की भाषा है। हिंदी के अंदर वह क्षमता है जिससे वह अपना वजूद खुद बना लेती है। हिंदी के उत्थान में अमर उजाला का यह अभियान इसको और समृद्ध बनाएगा। राष्ट्रभाषा को लेकर कभी कोई संकट ही नहीं रहा है हमेशा मातृभाषा को लेकर के संकट होते हैं। हमें अपनी भाषा में आजीविका निर्मित करने होंगे। हमें क्षेत्रीय भाषाओं को समृद्ध करने की जरूरत है। - डॉ राम सुधार सिंह, साहित्यकार

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हिंदी में ही हो स्कूलों के पाठ्यक्रम
स्कूलों में ज्यादातर बच्चे अंग्रेजी में पढ़ाई कर रहे हैं इसी वजह से उनका हिंदी कमजोर हो रहा है। जिस तरह से इंटरनेट भी जीवन का एक हिस्सा बन गया है, उस पर विचार करना होगा। स्कूलों का पाठ्यक्रम भी हिंदी में होना चाहिए। आज जब हिंदी को समृद्ध करने की बात हो रही है, ऐसे में कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूपी बोर्ड परीक्षा में सबसे ज्यादा छात्र हिंदी में ही फेल हुए हैं। - प्रियंका अग्निहोत्री, साहित्यकार

आंदोलन की भाषा है हिंदी 
हिंदी में बात करते समय या तो उसका महिमामंडन किया जाने लगता है या तो हिंदी की स्थिति बेहद खराब बता दी जाती है। यह हिंदी भाषा के लिए सकारात्मक संकेत नही है। हिंदी का जन्म प्रतिरोध की भाषा से हुआ है। हिंदी आंदोलनों की भाषा है और मीरा, तुलसी सहित कई कवियों ने भी हिंदी को आंदोलन की भाषा के रूप में रूप लिया। इसको मजबूती प्रदान करने की दिशा में अमर उजाला का अभियान हिंदी हैं हम सार्थक कदम है। - जगन्नाथ दुबे, शोध छात्र, बीएचयू

भाषा के सांस्कृतिक स्वरूप को आगे बढ़ाने की जरूरत
हिंदी का अभियान केवल भाषायी अभियान नहीं बल्कि सांस्कृतिक अभियान है। भाषा संस्कृति होती है, इस भाषा के सांस्कृतिक स्वरूप को आगे बढ़ाने की दिशा में उसकी खूबियों को एक दूसरे से शेयर करने के लिए अमर उजाला का अभियान मजबूती प्रदान करेगा। भले ही अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करके लोग थोड़ा गुणी बनने लगते हैं, लेकिन अपनी मातृभाषा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। हम अपनी मातृ भाषाओं का संरक्षण करके राष्ट्रभाषा को संपन्न कर सकते हैं। - प्रो. सुमन जैन, महिला महाविद्यालय, बीएचयू

भारतीय भाषा नदियां, हिंदी है महानदी
हिंदी भाषा का विस्तार अब तेजी से होता जा रहा है। वह दिन दूर नहीं जब प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी हिंदी का तेजी से विस्तार होगा। रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि भारतीय भाषाएं नदियां हैं, हिंदी महानदी है। हिंदी में जो मूल भाषा है उसकी तरफ ध्यान देना है जरूरी है। पूरी दुनिया में पिछले एक दशक में हिंदी का जितना अभूतपूर्व विस्तार हुआ उतना कभी नहीं हुआ। हिंदी को अपनी लोक भाषाओं से ताकत लेनी चाहिए। - डॉ. वंदना झा, वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट

हिंदी में सामाजिक समरसता का भाव 
अगर हिंदुस्तान हमारा दिल है तो उसकी धड़कन हिंदी है। हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसके अंतर्गत सामाजिक समरसता का भाव उत्पन्न होता है। इससे अपनी संप्रेषण को एक दूसरे के माध्यम से स्थापित करते हैं। नई शिक्षा नीति में हिंदी के महत्व पर जोर दिया गया है। हिंदी संस्कृति ही नहीं है बल्कि संस्कार सिखाने वाली भाषा भी है। - डॉ. संतोष सिंह, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ

भाषा से ही बन सकता है समृद्धशाली राष्ट्र
किसी भी राष्ट्र या क्षेत्र की भाषा के माध्यम से ही उसको समृद्धशाली बनाया जा सकता है। एक छात्र अगर मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करता है तो उसका विकास भी बड़ी तेजी से होता है। बचपन से ही हिंदी मीडियम का छात्र रहा हूं। अब देखने को मिलता है कि 90 प्रतिशत लोग अंग्रेजी बोलने वाले मिलते हैं। सभी से हिंदी में ही बोलते है। - संपूर्णानंद पांडेय, लहरतारा

अमर उजाला की मुहिम सार्थक कदम 
अमर उजाला का अभियान हिंदी हैं हम, निश्चित ही हिंदी के उत्थान में एक सार्थक मुहिम है। हिंदी हमारी पहचान है और स्वतंत्रता के बाद हिंदी को जितनी समृद्धशाली भाषा होनी चाहिए उतनी नहीं हुई है। इसके लिए हम सभी को आगे आना होगा। स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में भी हिंदी की अहम भूमिका रही है और तमाम लोग हिंदी भाषा के लड़ाई के लिए सूत्रधार बने। - आस्था, शोध छात्रा, बीएचयू

जन जन को मिलाने वाली भाषा है हिंदी
हिंदी हमारे व्यवहार की भाषा होनी चाहिए। जन-जन को मिलाने वाली भाषा भी हिंदी है। ऐसे में इसके व्यावहारिक पक्ष को भी मजबूत करना होगा। हिंदी ने अपनी अलग पहचान बनाई है। अमर उजाला की यह मुहिम हिंदी को मजबूती प्रदान करेगी। - अंजली सिंह, शोध छात्रा, बीएचयू
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