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हिंदी दिवस: वाराणसी के डीएम की सफलता में हिंदी, 'जब लोग लोग हिंदी समझते-बोलते हैं तो अग्रेंजी में क्यो डराएं'

Mon, 14 Sep 2020 10:44 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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डीएम कौशल राज शर्मा
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हिंदी राजभाषा है, जनभाषा है, मातृभाषा है- यह सर्वविदित है। कामकाज में भी इसे खासा महत्व मिल रहा है। लेकिन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम से सफल हो पाना काफी मुश्किल माना जाता है। हालांकि ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए देश की सर्वोच्च सेवा में हिंदी माध्यम को चुना और सफलता के प्रतिमान स्थापित किए। अमर उजाला के 'हिंदी हैं हम' अभियान के तहत पेश हैं ऐसे लोगों में से एक वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की कहानी। जो हिंदी के साथ खड़े रहने का साहस देती है। वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा आईएएस बैच 2006 के हैं।

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लोग हिंदी समझते बोलते हैं तो अग्रेंजी में क्यो डराया जाए।
हम हिंदी को और बढ़ाने के लिए  मूल काम इसी भाषा में करने पर जोर दें। कई देश अपनी भाषा नहीं छोड़ते, यह भाव स्वाभिमान विकसित करता है। मैं कार्यालय के कामकाज में हिंदी को बढ़ावा देना का प्रयास करता हूं। 


सिविल सेवा में आने में हिंदी ने कैसे योगदान दिया?
हिंदी की वजह से मुझे भाषा और अभिव्यक्ति की अच्छी समझ थी। मुझे रलगता है कि इसी की वजह से मैं इंजीनियरिंग से लेकर आईआईटी में एमटेक की वरीयता सूची में सबसे ऊपर रहा। और फिर पहले ही प्रयास में आईएएस बन गया।

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हिंदी की लोकप्रियता में इजाफे के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
मेरा मानना है कि हम हिंदी को और बढ़ाने के लिए सभी मूल काम इसी भाषा में करने पर जोर दें। कई देश अपनी भाषा नहीं छोड़ते इससे स्वाभिमान विकसित होता है। मैं कार्यालय की फाइलों की टिप्पणियों में हिंदी को बढावा देने का प्रयास करता हूं। आदेश दे रखे हैं कि अधिकतर काम हिंदी में करें। मेरा कार्यक्षेत्र यूपी है, जहां लोग हिंदी समझते हैं, तो क्यों उन्हें अंग्रेजी या किसी और भाषा में डराया जाए।
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