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संस्कृत विश्वविद्यालय में हंगामा: जमीन मापी करने गई टीम को कर्मचारियों ने खदेड़ा, राज्यपाल नहीं पहुंचीं

Mon, 17 Oct 2022 06:33 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की दो एकड़ भूमि बिजली विभाग को दे दिया गया है। इसके विरोध में अध्यापक संघ, अधिकारी संघ ,कर्मचारी संघ एवं छात्र संघ मिलकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को हंगामा तब बढ़ गया जब बिजली विभाग और प्रशासन की टीम विश्वविद्यालय पहुंची। 
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में जमीन की पैमाइश करने पहुंची राजस्व टीम को शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों ने खदेड़ दिया और प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। परिसर के बाहर जुलूस निकालकर विश्वविद्यालय भूमि बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने जमीन के पट्टे का विरोध किया। हंगामे को देखते हुए राज्यपाल के भ्रमण व निरीक्षण का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। हंगामे को देखते हुए पुलिस तैनात की गई है।

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सोमवार को राजस्व टीम विश्वविद्यालय की पैमाइश करने पहुंची। धरने पर बैठे शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों को जब इसकी जानकारी मिली तो वह मौके पर पहुंचे और पैमाइश का काम रोक दिया। इसके बाद शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ और छात्रसंघ ने पैमाइश करने पहुंची टीम को खदेड़ दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के चारों तरफ जुलूस निकालकर विरोध जताया। 

प्रदर्शन के बाद जुलूस वापस प्रशासनिक भवन के सामने धरना स्थल पर पहुंचा। तीनों संघ के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि जब तक विश्वविद्यालय भूमि के पट्टे को निरस्त नहीं किया जाता है तब तक धरना और विरोध प्रदर्शन चलता रहेगा।
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परिसर में तनाव की स्थिति को देखते हुए सभी गेटों पर पुलिस तैनात की गई है। विश्वविद्यालय में कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का दौरा निरस्त होने के बाद उन्होंने कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी को सर्किट हाउस बुलवाया।  

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विश्वविद्यालय की जमीन को बिजली विभाग को देना संस्था के मूल पर प्रहार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन को बिजली विभाग को देना संस्था के मूल पर प्रहार है। 232 साल पुरानी प्राच्य एवं देववाणी भाषा को पोषण देने के लिए स्थापित विश्वविद्यालय के कण-कण में अध्यात्म, राष्ट्रीयता और भारतीय संस्कृति के तत्व हैं। विश्वविद्यालय की जमीन को वापस लेने के लिए कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री एवं उच्चाधिकारियों से मिलकर समाधान का प्रयास किया जा रहा है।


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