संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन को बिजली विभाग को देना संस्था के मूल पर प्रहार है। 232 साल पुरानी प्राच्य एवं देववाणी भाषा को पोषण देने के लिए स्थापित विश्वविद्यालय के कण-कण में अध्यात्म, राष्ट्रीयता और भारतीय संस्कृति के तत्व हैं। विश्वविद्यालय की जमीन को वापस लेने के लिए कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री एवं उच्चाधिकारियों से मिलकर समाधान का प्रयास किया जा रहा है।