ज्ञानवापी से जुड़े मुकदमों में अनुतोष अलग-अलग हैं। पक्षकार भी अलग-अलग हैं। ऐसे में न इनके मामले एकीकृत किए जा सकते हैं और न ही स्थानांतरित किए जा सकते हैं। अदालत में दलील जारी है। बता दें कि किरन सिंह की तरफ से दाखिल वाद में भगवान आदि विश्वेश्वर का ज्ञानवापी का मलिकाना हक और तथाकथित मस्जिद के गुंबद को हटाकर कब्जा दिए जाने की मांग की गई है।
सिविल जज सीनियर डिविजन अश्वनी कुमार की अदालत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर भी बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान वादी की तरफ से कहा गया कि जब तक इस वाद का निर्णय नहीं हो जाता तबतक के लिए अंतरिम आदेश पारित कर दर्शन,पूजन, राग, भोग की अनुमति दी जाए।
अदालत ने इस पर सुनवाई की तिथि 23 जनवरी तय करते हुए सभी पक्षकारों से मौजूद रहने को कहा। बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग जैसी आकृति को आदि विश्वेश्वर बताते हुए नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग के लिए यह वाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल किया गया है।