मैदागिन के रहने वाले 12 वर्षीय बालक के अभिभावकों का कहना है कि एक साल पहले तक उनके बेटे का व्यवहार काफी मिलनसार था। अब मोबाइल के कारण उसका व्यवहार बदल गया है। वह धीरे-धीरे समाज और परिवार से कटने लगा है। रिश्तेदारों के पास भी जाने से ये किशोर बच रहे हैं।
आजमगढ़ के 17 वर्षीय बालक के अभिभावकों का कहना है कि बेटा हर समय ऑनलाइन गेम में डूबा रहता है। पढ़ाई और स्कूल जाना छोड़ दिया है। हाईस्कूल की परीक्षा में नंबर भी कम आए। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, अधीरता और दूसरों की भावनाओं के प्रति उदासीनता अभिभावकों को भीतर से तोड़ रही है।
मोबाइल की लत से बच्चों को दूर कर ही इस बीमारी से बचा जा सकता है। माता- पिता अपने बच्चों को पर्याप्त समय दें। शुरू में यह छोटी समस्या लगती है, लेकिन आगे चलकर यह दिमाग से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। - डॉ. बृजेश कुमार, बाल रोग चिकित्सक।