फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health: कम उम्र में वर्चुअल ऑटिज्म से पीड़ित हो रहा जेन जी, रोज 40 का हो रहा इलाज; करें ये काम

Sun, 01 Feb 2026 01:15 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: इस बीमारी से पीड़ित किशोर स्कूल जाने से भी बच रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल के पहले वह कई तरह के बहाने बनाते हैं। स्कूल का समय बीतते ही मोबाइल का इस्तेमाल शुरु कर देते हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि बच्चों खाना खाने को लेकर भी तरह तरह के बहाने बनाते हैं।
विज्ञापन
ऑटिज्म। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Autism: तकनीक के दौर में 10-15 साल के किशोरों का जीवन मोबाइल में सिमटता नजर आ रहा है। कभी मनोरंजन तो कभी ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर शुरू हुआ स्क्रीन बच्चों को मानसिक रूप से बीमार बना रहा है। 

विज्ञापन


मनोरोग चिकित्सक इस बीमारी को वर्चुअल ऑटिज्म बता रहे हैं। मंडलीय अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी और प्रदेश सरकार के टेलीमानस विंग में इस प्रकार के रोज 30-40 मरीज आ रहे हैं। सामने आ रहा है कि बच्चों में चिड़चिड़ापन, रोना, आक्रामक व्यवहार और एकाग्रता की कमी आ रही है। 

छोटी उम्र में सीखने की ललक होती है अधिक : मनोरोग चिकित्सक डॉ. उपासना राय ने बताया कि छोटी उम्र में दिमाग तेजी से सीखता है, लेकिन जब इस दौरान बच्चा घंटों स्क्रीन देखता है तो उसकी भाषा का विकास, कौशल विकास और भावनात्मक समझ प्रभावित होती है। इसे वर्चुअल ऑटिज्म कहा जाता है। इससे किशोरों में आत्मविश्वास की भी कमी आ रही है। 

विज्ञापन
Trending Videos

मैदागिन के रहने वाले 12 वर्षीय बालक के अभिभावकों का कहना है कि एक साल पहले तक उनके बेटे का व्यवहार काफी मिलनसार था। अब मोबाइल के कारण उसका व्यवहार बदल गया है। वह धीरे-धीरे समाज और परिवार से कटने लगा है।  रिश्तेदारों के पास भी जाने से ये किशोर बच रहे हैं।

आजमगढ़ के 17 वर्षीय बालक के अभिभावकों का कहना है कि बेटा हर समय ऑनलाइन गेम में डूबा रहता है। पढ़ाई और स्कूल जाना छोड़ दिया है। हाईस्कूल की परीक्षा में नंबर भी कम आए। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, अधीरता और दूसरों की भावनाओं के प्रति उदासीनता अभिभावकों को भीतर से तोड़ रही है। 

ये काम करें
  • मोबाइल के लिए समय सीमा निर्धारित करें।  
  • सोशल मीडिया एप्स के नोटिफिकेशन बंद करें।  
  • अपने फोन को दूर रखें और अपने आसपास के लोगों व परिवार की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • माइंड फुलनेस का अभ्यास करें और विचारों को नियंत्रित करने का प्रयास करें। 
विज्ञापन

मोबाइल की लत से बच्चों को दूर कर ही इस बीमारी से बचा जा सकता है। माता- पिता अपने बच्चों को पर्याप्त समय दें। शुरू में यह छोटी समस्या लगती है, लेकिन आगे चलकर यह दिमाग से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। - डॉ. बृजेश कुमार, बाल रोग चिकित्सक। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें