सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के बेटे रोहित की मौत के बाद की कहानी तो आपने सुनी ही होगी। अब पूरी दुनिया इसे जान सकेगी, वह भी महज एक क्लिक पर। डोम राजा के यहां नौकरी कर रहे राजा हरिश्चंद्र और उनकी पत्नी तारा के बीच बेटे रोहित के शवदाह के लिए कर देने के संबंध में हुए मार्मिक संवाद के साथ ही काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट का समूचा इतिहास न सिर्फ ऑनलाइन होगा बल्कि दोनों घाटों पर इसकी जानकारियों वाले शिलापट्ट और बोर्ड भी लगाए जाएंगे।
सनातन धर्मियों के इन मोक्ष स्थानों को काशी के वेब पोर्टल और शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर ‘हृदय’ के कालम में विशेष स्थान दिया जाएगा। घाट का नाम हरिश्चंद्र कैसे पड़ा। डोमराज परिवार का इतिहास क्या है। बाबा विश्वनाथ की इस नगरी में चौबीस घंटे शव कैसे जलाए जाते हैं, अब दुनिया इसे विस्तार से जान सकेगी।
इसकी कार्ययोजना तैयार हो रही है। आगामी वित्तीय वर्ष 2015-16 में इसके कार्यान्वयन की पूरी संभावना है। इसके लिए हरिश्चंद्र घाट के डोम राजा परिवार की भी मदद ली जाएगी। दरअसल, काशी देश के उन दुर्लभ स्थानों में से है जहां हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पर शवदाह कभी रुकता नहीं है। चाहे मूसलधार बारिश हो, हाड़कंपाती ठंड या फिर लू चले, शवदाह का सिलसिला चलता रहता है। इसे देखने देश और दुनिया के सैलानी और श्रद्धालु रोजाना यहां पहुंचते हैं।
अब पर्यटन के लिहाज से इनका दुनिया में प्रचार-प्रसार किया जाएगा। महापौर के सलाहकार राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि ‘हृदय’ के तहत इसकी कार्ययोजना बनाई जा रही है। हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट पर लोगों के बैठने, प्रकाश, पेयजल, शौचालय, जलनिकासी और आवागमन की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। दोनों घाटों पर उनकी ऐतिहासिकता और महत्व को बताने वाले शिलापट्ट और बोर्ड लगाए जाएंगे।
इन पर घाटों के इतिहास का विवरण उल्लेखित होगा। इंटरनेट यूजर्स के लिए दोनों घाटों का पूरा विवरण ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय ने कार्ययोजना तैयार होने के बाद उसे मूर्तरूप देने के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया है।