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गंगा में डूबी मेहनत: चंदौली के 11 गांवों में 35 बीघा सब्जी बर्बाद, 100 किसानों की लागत पानी में समाई; परेशानी

Fri, 21 Aug 2026 06:13 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

चंदौली में गंगा के उफान से कछार क्षेत्र की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। 11 गांवों में करीब 35 बीघा सब्जी की फसल जलमग्न होने से 100 किसानों की मेहनत और लागत पानी में डूब गई। खेतों में परवल, मिर्च और टमाटर की फसल बर्बाद हो गई। किसानों ने नुकसान का आकलन कर मुआवजे की मांग की है।
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चंदौली के 11 गांवों में 35 बीघा सब्जी बर्बाद। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी ने तटवर्ती इलाकों के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गंगा के कछार में सब्जी की खेती करने वाले किसानों की मेहनत पर बाढ़ के पानी ने पानी फेरना शुरू कर दिया है। जिले के टांडाकला क्षेत्र समेत 11 गांवों में करीब 35 बीघा सब्जी की फसल पानी में डूब चुकी है। इससे करीब 100 किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई किसानों का कहना है कि फसल पूरी तरह बर्बाद होने से खेती में लगाई गई लागत तक निकलना मुश्किल है।

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हालांकि अभी तटवर्ती गांवों के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन जिस तेजी से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों को आशंका है कि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो कछार के बाकी खेत भी जलमग्न हो जाएंगे। इससे सब्जी की तैयार और तैयार होने वाली फसल दोनों बर्बाद हो सकती हैं।

कछार की खेती पर गंगा का कहर
गंगा किनारे के कछार वाले इलाकों में हर साल बड़ी संख्या में किसान परवल, मिर्च, टमाटर, लौकी समेत विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। यहां की रेतीली जमीन सब्जी की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। किसान कई महीने पहले खेत तैयार कर फसल लगाते हैं और फसल तैयार होने के समय उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती है। 

इस बार भी किसानों ने बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती की थी, लेकिन पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ रहे गंगा के जलस्तर ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई खेतों में पानी भर जाने से पौधे डूब गए हैं। जिन खेतों में पानी लगातार बढ़ रहा है, वहां फसल के पूरी तरह नष्ट होने का खतरा बना हुआ है। 

टांडाकला क्षेत्र में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। सोनबरसा, चकरा, पूरा विजई, पूरा गणेश, सरौली, महमदपुर, निधौरा, पकड़ी, डेरवा, कैलावर समेत कई गांवों के कछार क्षेत्र में सब्जी की फसल पानी में डूब गई है।ग्रामीणों के अनुसार करीब 25 बीघा सब्जी की फसल जलमग्न हो चुकी है। कई अन्य खेतों में भी पानी तेजी से पहुंच रहा है। खेतों में पानी भरने से मिर्च, टमाटर, लौकी और अन्य मौसमी सब्जियों की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं।

फसल के साथ पशुओं के चारे की भी चिंता
बाढ़ के पानी ने किसानों की केवल सब्जी की फसल ही प्रभावित नहीं की है, बल्कि ग्रामीणों के सामने मवेशियों के चारे की समस्या भी खड़ी होने लगी है। खेतों और आसपास के निचले इलाकों में पानी भरने से हरा चारा प्रभावित हुआ है। किसानों को चिंता है कि यदि पानी और बढ़ा तो पशुओं के लिए चारे का संकट गहरा सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि अभी रिहायशी क्षेत्र सुरक्षित हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी रही तो निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने भी परेशानी खड़ी हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सतर्कता बढ़ाने की मांग की है।किसानों ने कहा कि सब्जी की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च होती है। फसल तैयार होने के समय बर्बाद होने से किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए नुकसान का सही आकलन कर राहत उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

केस-1 : अजय की आठ बीघा परवल की फसल डूबी
सहजौर गांव निवासी किसान अजय ने गंगा के किनारे कछार क्षेत्र में करीब 10 बीघे में परवल की खेती की थी। उनका कहना है कि गंगा का पानी बढ़ने के कारण आठ बीघे खेत जलमग्न हो चुके हैं। पानी में डूबी परवल की फसल बर्बाद होने लगी है। अजय ने बताया कि फसल में काफी लागत लगाई गई थी। जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो बाकी दो बीघे भी पानी में डूब जाएंगे। ऐसे में पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और खेती में लगी लागत भी वापस नहीं मिल पाएगी। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित किसानों की फसल का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।

केस-2 : गुड्डू का एक बीघा खेत जलमग्न
सहजौर गांव के ही किसान गुड्डू ने करीब तीन बीघे में परवल की खेती की थी। इनमें से एक बीघा खेत गंगा के पानी में डूब चुका है। पानी में फसल डूबने से उनकी उपज बर्बाद हो गई है। गुड्डू के मुताबिक बाकी खेतों में भी पानी लगातार बढ़ रहा है। अगर जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों ने बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई समेत खेती में काफी पैसा लगाया है। फसल बर्बाद होने की स्थिति में लागत निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।

केस-3 : टांडाकला क्षेत्र में मिर्च और टमाटर की फसल प्रभावित
सोनबरसा और आसपास के गांवों के किसानों की मिर्च और टमाटर की फसल पानी में डूबने लगी है। किसानों का कहना है कि सब्जियों की फसल तैयार होने के समय पानी भरने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जलस्तर और बढ़ा तो पूरी फसल नष्ट हो जाएगी।

केस-4 : लौकी की फसल पर भी संकट
टांडाकला क्षेत्र के कछार में 50 किसानों ने लौकी समेत अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की है। खेतों में पानी भरने से बेल वाली फसलों पर भी संकट मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि लगातार पानी जमा रहने से पौधों के सड़ने की आशंका है। इससे लागत निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।

इन गांवों में पहुंचा गंगा का पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर से टांडाकला क्षेत्र के सोनबरसा, चकरा, पूरा विजई, पूरा गणेश, सरौली, महमदपुर, निधौरा, पकड़ी, डेरवा और कैलावर समेत आसपास के गांव प्रभावित हुए हैं। सहजौर में भी कछार की खेती पानी में डूबी है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में किसान सब्जी की खेती पर निर्भर हैं।

प्रशासन से सर्वे और राहत की मांग
किसानों ने राजस्व और कृषि विभाग से मौके पर सर्वे कराने, फसल नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने और बाढ़ की स्थिति बनने पर समय रहते राहत एवं बचाव की तैयारी करने की भी मांग की है।

किसानों ने कहा, मेहनत पानी में डूब गई
गंगा का पानी लगातार बढ़ने से खेत में लगी मिर्च, टमाटर और लौकी की फसल डूब रही है। कई दिनों से मेहनत कर तैयार की गई फसल अब आंखों के सामने बर्बाद हो रही है। अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो बची हुई फसल भी नहीं बच पाएगी। खेती में जो पैसा लगाया था, वह भी निकलना मुश्किल है। प्रशासन को तत्काल सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिलाना चाहिए। - कक्कू पाण्डेय, किसान, सोनबरसा

कछार की जमीन पर सब्जी की खेती से ही परिवार का खर्च चलता है। गंगा का पानी खेत में घुसने से फसल बर्बाद हो गई है। बीज, खाद, दवा और मजदूरी में काफी खर्च हुआ था, लेकिन अब लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। पानी और बढ़ा तो बाकी खेत भी डूब जाएंगे। सरकार को नुकसान का आकलन कर किसानों को राहत देनी चाहिए। - प्रदीप पाण्डेय, किसान, सोनबरसा
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गंगा के बढ़ते जलस्तर की वजह से तटवर्ती गांवों में फसलें डूब रही हैं। ज्यादा नुकसान होने पर वहां के लेखपाल रिपोर्ट बनाकर भेजते हैं। उसपर किसानों की सहायता भी की जाती है। अगर किसान बीमा कराए होंगे तो उसका भी लाभ मिलेगा। - विनोद कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी, चंदौली
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