कोरोना की दूसरी लहर में बदले लक्षणों ने सबसे ज्यादा युवाओं को अपनी चपेट में लिया है। कोरोना संक्रमितों में हैप्पी हाइपोक्सिया जानलेवा साबित हो रहा है। वाराणसी सहित पूर्वांचल में कोरोना से हुई मौतों में 80 फीसदी तक आक्सीजन की कमी कारण बनी है। विशेषज्ञ कोरोना मरीजों की अचानक बिगड़ती तबियत के पीछे हैप्पी हाइपोक्सिया को मान रहे हैं। सामान्य कोरोना मरीजों में ये लक्षण ज्यादा हैं और बुखार, खांसी नहीं होने की वजह से जब तब आक्सीजन का स्तर कम होता है, तब तक हालत ज्यादा ही बिगड़ जाती है।
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के चेस्ट विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एसके अग्रवाल ने बताया कि बीएचयू आने वाले ज्यादातर मरीज हैप्पी हाइपोक्सिया की चपेट में हैं। यह बीमारी ज्यादातर युवाओं को अपनी चपेट में ले रही है। इसमें आक्सीजन लेवल अचानक गिरता है और 70 तक पहुंच जा रहा है। यही कारण है कि जब तक लोग समझ रहे हैं मरीज की मौत हो जा रही है। प्रोफेसर एसके अग्रवाल बताते हैं कि हैप्पी हाइपोक्सिया में फेफड़ों में संक्रमण फैलने से कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। इससे खून में आक्सीजन घुल नहीं पाता है।
ऑक्सीजन लेवल से पहचान सकते हैं हैप्पी हाइपोक्सिया
कोरोना संक्रमित मरीजों में इस बीमारी की वजह से आक्सीजन स्तर गिरने की समस्या आम है। ऐसे में घर में आक्सीमीटर रखें और उससे लगातार जांच करते रहें। इसके अलावा एक सांस में गिनती गिनने, सांस रोकने और डीप ब्रीथिंग से इसकी पहचान की जा सकती है। ऑक्सीजन की कमी होने पर पेट के बल लेटने से सांस लेने में आसानी होगी। यह फेफड़ों को मजबूत करने का अच्छा तरीका है। लंबी लंबी सांस लें और छोड़े, जिससे ऑक्सीजन की जरूरत भी पूरी होगी और फेफड़े भी मजबूत होंगे। आक्सीजन 90 से नीचे आए तो सतर्क हो जाएं।