यह व्यवस्था सौ दो-सौ सालों में बदलती गईं। धीरे-धीरे सारी चीजें कम होती गईं। उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह है कि धीरे-धीरे वे परंपराएं वापस आ रही हैं। वाराणसी जैसे अति प्राचीन नगरी में ऐसे कार्यों की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने मुंबई स्थित कैंसर अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी हास्पिटल के बाहर इसी तरह का रोटी बैंक चलाया जाता है।
केरल के एक जिले में लोगों के बचे हुए भोजन को गाड़ी से इकट्ठा कर शाम के समय चिह्नित जगहों पर जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है। आंध्र प्रदेश में इडली का बैंक चलता है। स्कूल के बच्चों द्वारा अतिरिक्त इडली घर से टिफिन में लाकर डोनेट की जाती हैं जो गरीबों में वितरित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के मॉडल तैयार कर घाटों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों व अन्य चिह्नित जगहों पर ऐसे लोगों के लिए जिन्हें भोजन नसीब नहीं उन तक भोजन पहुंचाने का कार्य किया जाना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि हमें एक कदम आगे बढ़ कर समाज के और लोगों को जोड़ना और इस कार्य को आगे बढ़ाना है।
महानगर उद्योग व्यापार समिति के संरक्षक नारायण खेमका ने कहा कि बाबा विश्वनाथ व माता अन्नपूर्णा के इस नगरी में कभी भी कोई भूखा सोया नहीं है और न सोएगा। हैप्पी फ्रिज के लगने से उस गरीब के थाली में भोजन यहां से मिल जाएगा।