लोगों की भीड़ लग गई। सभी आपस में मिल-जुलकर विचार करने लगे। राजकुमार के परिजनों ने सूचना देकर रानी के पिता कन्हैया और प्रेमी के पिता समरजीत को नोनरा गांव बुलाया गया। वहां घंटों चली पंचायत के बाद रानी को उसके प्रेमी प्रशांत के साथ विदा कर दिया गया।
वहीं दहेज में मिले सामान को भी वापस कर दिया गया। इस दौरान गांव में काफी गहमा-गहमी रही। इस सबंध में राजकुमार राम ने बताया कि पत्नी रानी को उसके प्रेमी के साथ विदा करने के अलावा कोई चारा नहीं था। दोनों परिवारों की रजामंदी पर यह फैसला लिया गया। इसी में सबकी भलाई थी।