महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षा शास्त्र विभाग में डॉ. वीणा वादिनी ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने आधी आबादी की शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण समझा। इसके लिए अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले को शिक्षित कर समाज को एक संदेश दिया कि यदि स्त्री शिक्षित होगी तभी देश विकास के पथ पर अग्रसर होगा।
सोमवार को समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर आयोजित ज्योतिबा फुले का शैक्षिक अवदान विषयक व्याख्यान माला को संबोधित करते हुए आर्या द्विवेदी ने ज्योतिबा फुले के की जीवन यात्रा को रेखांकित किया। डॉ. सुरेन्द्र राम ने ज्योतिबा फुले द्वारा विपरीत परिस्थितियों में सामाजिक न्याय के लिए किए जाने वाले प्रयास की सराहना की। डॉ. दिनेश कुमार ने स्त्रियों को बराबरी का हक दिलाने के लिए ज्योतिबा फुले के प्रयासों को सराहना की। इस दौरान श्रद्धा, हिमांशु, डॉ. शैलेन्द्र वर्मा, डॉ. राखी देब, रमेश प्रजापति, डॉ. अभिलाषा जायसवाल, डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. ध्यानेंद्र मिश्रा, डॉ. ज्योत्स्ना राय आदि मौजूद रहे।
ज्योतिबाफुले की जयंती पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर हुआ आयोजन
साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने पराधीनता काल में स्त्री शिक्षा और सशक्तिकरण का स्वाधीन इतिहास लिखा। उन्होंने जनसाधारण के लिए भारतीय मूल्यपरक शिक्षा देने का आग्रह किया। इसका प्रमाण उनका वह बयान है जो उन्होंने 19 अक्तूबर 1882 में हंटर शिक्षा आयोग के सामने दिया था।
सोमवार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा महात्मा ज्योतिबा फुले की 195वीं जयंती पर आयोजित ऑनलाइन संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। डॉ. माधव ने कहा कि आजादी के बाद इतिहासकारों ने उनके जीवन का आंशिक सत्य ही लिखा। अतिवादी संकुचित दृष्टि से उनके योगदान की चर्चा की। हमें इस प्रकार के लेखन से भी भविष्य में सजग रहने की जरूरत है। मुख्य वक्ता मुंबई में महात्मा फुले प्रकाशन समिति में सदस्य सचिव प्रो हरि नरके ने कहा कि वीर सावरकर ने अपनी पुस्तक में उन्हें सामाजिक क्रांति के जनक के रूप में उद्धृत किया। वहीं देर शाम को अस्सी घाट पर ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से रंग चेतना की प्रस्तुति हुई। संयोजन एनएसडी के निदेशक रामजी बाली ने किया।