शिक्षित होने के साथ-साथ दृढ़ इच्छा शक्ति से ही महिलाएं अत्याचार से निजात पा सकती हैं। लोगों को भी महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी, तभी समाज और देश का उत्थान होगा। यह शिक्षा और संस्कार के बगैर के संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षित महिलाओं को समाज में आगे आना होगा। परिवार के लोगों को भी महिलाओं का सहयोग करना होगा, तभी महिलाएं चुनौतियों का सामना कर सकेंगी। महिलाओं की सुरक्षा पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
ये बातें जीरा बस्ती स्थित ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल में मंगलवार को अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित ‘महिला की सुरक्षा और कमजोर कड़ी’ विषयक संवाद में महिलाओं ने एकस्वर में कहीं। आयोजन में शामिल महिलाओं ने कहा कि वर्तमान परिवेश में लोगों की सोच बदली है। वर्तमान में महिलाएं नौकरी से लेकर राजनीति तक कर रही हैं। कहा कि निर्भया के विपक्षी के वकील एमपी सिंह ने अपने प्रोफेशन को बदनाम किया है और महिलाओं के अधिकार का हनन किया है।
महिलाओं को सुरक्षा के लिए इच्छा शक्ति बढ़ानी होगी। खुद और बच्चों को शिक्षित करना होगा। महिलाएं बचपन से ही बच्चों को संस्कार दें और बेटा-बेटी के अंतर खत्म करें। लड़कियों को सही गलत के बारे में बताएं। संयुक्त परिवार में रहना सीखें। परिवार के सदस्य महिलाओं का सहयोग करें।
सीमा राय, ईओ, नगर पंचायत बांसडीह।
महिलाओं की सुरक्षा तथा कानून के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है, क्योंकि कायदे-कानून तो बने हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी का अभाव है। महिला सशक्तीकरण को लेकर अमर उजाला का यह अभियान सराहनीय है।
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आरती सिंह
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने तमाम कानून बनाए हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में महिलाएं कोई कदम नहीं उठा पाती हैं। इसलिए इनका प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है।
मधु श्रीवास्तव
परिवार और स्कूलों में ऐसी शिक्षा दी जाए कि लड़कियां और महिलाएं अपनी सुरक्षा खुद कर सकें। इसके अलावा बच्चों को बचपन से ही संस्कार दिया जाना चाहिए। बेटा-बेटी का भेद खत्म करना होगा।
प्रेमा यादव
महिलाएं मानसिक रूप से मजबूत होती हैं लेकिन शारीरिक रुप से कमजोर होती हैं। ऐसे में सुरक्षा के दृष्टिकोण से विद्यालयों में छात्राओं को कराटे और आत्मरक्षा के गुर सिखाने चाहिए। ताकि पुलिस के आने तक वे अपनी सुरक्षा कर सकें।
संध्या सिंह
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप लगाकर महिलाओं और लड़कियों को कराटे और आत्म सुरक्षा का प्रशिक्षण देना चाहिए। इसके अलावा कार्टून वीडियो के माध्यम से सेक्स एजुकेशन देना चाहिए ताकि लड़कियों को सही गलत का एहसास हो सकें।
मधु तिवारी
परिवेश ऐसा हो गया है कि वर्तमान में कोई महिला या लड़की अकेली नहीं चल सकती है। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि लड़कियां भी स्वतंत्र होकर घूम सकें। यह तभी संभव है, जब लोग अपनी सोच को बदलेंगे।
सिम्मी सिंह
महिलाओं के लिए कायदे-कानून तो बने हैं लेकिन वे धरातल पर नहीं दिख रहे हैं। महिला सुरक्षा के कानूनों का ठीक से क्रियान्वयन होना चाहिए। महिलाएं कानून का लाभ जानकारी के अभाव में नहीं ले पा रही हैं। महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता है।
मधु श्रीवास्तव
महिलाओं को सबसे पहले अपने आपको शिक्षित करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें आत्मविश्वास बढ़ा होगा, तभी वे अपनी सुरक्षा कर सकती हैं।
रीना मिश्रा
सरकार ने जो नियम और कानून बनाए हैं, उसे कड़ाई से लागू किया जाय। कुछ महिलाएं कानून का दुरुपयोग कर पीड़ित महिलाओं के अधिकारों का हनन कर रही हैं। इससे उन्हें बचना चाहिए।
प्रिया पांडेय
महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून के बारे में महिलाओं और लड़कियों को जानकारी देनी चाहिए। जगह-जगह कैंप लगाकर महिलाओं और लड़कियों को जागरूक करना चाहिए, ताकि वे जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ सकें।
सोनी प्रकाश
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सुरक्षा के लिए जो कानून बनाए गए हैं उसकी जानकारी महिलाओं और लड़कियों को नहीं है। स्कूल, कालेज व ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न संस्थाओं और अन्य माध्यमों से जानकारी देने की आवश्यकता है।
अराधना राय