दूल्हे के स्वागत के लिए कौन-कौन से पकवान पकाए जा रहे हैं। सखियां पार्वती का साज शृंगार करने के लिए कैसे-कैसे सुंदर फूल चुन कर ला रही हैं। हल्दी की रस्म के बाद नजर उतारने के लिए ‘साठी क चाऊर चूमिय चूमिय..’ गीत गाकर महिलाओं ने गौरा की रजत मूर्ति को चावल से चूमा।
गौरा के तेल-हल्दी की रस्म के लिए पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के सानिध्य में संजीव रत्न मिश्र ने माता गौरा का शृंगार किया और अंकशास्त्री पं. वाचस्पति तिवारी के संयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम शिवांजली के अंतर्गत आराधना सिंह, पुनीत पागल, संजय दुबे, प्रियंका पांडेय और रीता शर्मा ने शिव भजनों की प्रस्तुति की।
14 मार्च को रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा महंत आवास से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक निकाली जाएगी।